नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से बड़ी संख्या में पाकिस्तानी शिया मुसलमानों (Pakistani Shia Muslims) के लौटाए जाने की खबरों ने पाकिस्तान में चिंता बढ़ा दी है। कई लोग दावा कर रहे हैं कि उन्हें अचानक हिरासत में लेकर बिना पर्याप्त तैयारी के वापस भेज दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद मानवाधिकार संगठनों और पाकिस्तानी शिया समुदाय में बेचैनी देखी जा रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के महीनों में यूएई से लौटाए गए लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इनमें ऐसे लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो वर्षों से खाड़ी देशों में नौकरी कर रहे थे।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में Iran और Israel के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। कुछ पाकिस्तानी शिया संगठनों का दावा है कि फरवरी के बाद यूएई में पाकिस्तानी शियाओं की जांच और डिपोर्टेशन की घटनाओं में तेजी आई।
हालांकि यूएई प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन प्रभावित लोगों के बयान और स्थानीय संगठनों के दावों ने इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
डिपोर्ट होकर लौटे कई पाकिस्तानियों ने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान उनसे उनके आर्थिक लेनदेन और धार्मिक संबंधों को लेकर सवाल किए गए। कुछ लोगों ने दावा किया कि अधिकारियों ने उनसे पूछा कि क्या वे ईरान को आर्थिक मदद भेजते हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें बैंक खातों तक पहुंच या निजी सामान लेने का मौका भी नहीं दिया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पाकिस्तान के शिया संगठन Majlis Wahdat-e-Muslimeen का दावा है कि हजारों पाकिस्तानी शिया नागरिकों को यूएई से वापस भेजा गया है। संगठन के नेताओं का कहना है कि वास्तविक संख्या आधिकारिक आंकड़ों से अधिक हो सकती है।
सीमावर्ती और शिया बहुल इलाकों के कई परिवारों पर इसका आर्थिक असर भी पड़ा है, क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाली रकम पर बड़ी संख्या में परिवार निर्भर रहते हैं।
Human Rights Watch ने इन रिपोर्टों को गंभीर बताते हुए मामले की जानकारी जुटाने की बात कही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी समुदाय को उसके धार्मिक आधार पर निशाना बनाया गया है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पाकिस्तान सरकार ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि यूएई ने किसी व्यक्ति को उसके संप्रदाय के आधार पर नहीं निकाला है। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के अनुसार, जिन लोगों को वापस भेजा गया है, उनके खिलाफ स्थानीय नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले थे।
हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया है कि बड़ी संख्या में लौटे लोगों की स्थिति की समीक्षा की जा रही है और मामले पर नजर रखी जा रही है।
यूएई से लौटे कई लोगों का कहना है कि अचानक नौकरी छूटने और वित्तीय संसाधनों तक पहुंच बंद होने से उनके परिवार मुश्किल में आ गए हैं। पाकिस्तान में बड़ी संख्या में परिवार खाड़ी देशों से आने वाली रेमिटेंस पर निर्भर रहते हैं, ऐसे में इस घटनाक्रम का सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ रहा है।
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