नई दिल्ली। भारत में मानसून (Monsoon in India) के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले एक वैश्विक मौसम चेतावनी (Global Weather Warning) ने चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की मौसम एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने समुद्र के बढ़ते तापमान और संभावित अल नीनो प्रभाव को लेकर दुनिया के देशों के लिए पूर्वानुमान जारी किया है। एजेंसी के मुताबिक, आने वाले महीनों में मौसम का पैटर्न सामान्य से अलग रह सकता है, जिसका असर बारिश, तापमान और कृषि पर देखने को मिल सकता है।
WMO के अनुमान के अनुसार, जून से अगस्त 2026 के बीच अल नीनो बनने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है। एजेंसी का कहना है कि प्रशांत महासागर के असामान्य रूप से गर्म होने के कारण यह मौसमी घटना तेजी से विकसित हो सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर मौसम संबंधी असामान्य स्थितियां पैदा होने का जोखिम बढ़ेगा।
भारत के लिए क्या संकेत?
WMO द्वारा साझा किए गए पूर्वानुमान मानचित्र में भारत के कई हिस्सों को ऐसे क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है, जहां सामान्य से कम वर्षा की आशंका जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो की स्थिति बनने पर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर दबाव पड़ सकता है, जिससे कुछ इलाकों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है।
वहीं, दक्षिण एशिया के कुछ अन्य हिस्सों में अधिक वर्षा की संभावना भी जताई गई है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह शुरुआती संकेत हैं और वास्तविक प्रभाव कई अन्य मौसमी कारकों पर भी निर्भर करेगा।
समुद्र का बढ़ता तापमान बना वजह
WMO के मुताबिक, प्रशांत महासागर के सतही जल का तापमान सामान्य से अधिक होने के कारण अल नीनो की परिस्थितियां मजबूत हो रही हैं। इसका असर केवल बारिश पर ही नहीं, बल्कि तापमान में वृद्धि, सूखे, अत्यधिक वर्षा और हीटवेव जैसी घटनाओं के रूप में भी देखने को मिल सकता है।
हाल ही में भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी संकेत दिए थे कि कुछ क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। ऐसे में मौसम विशेषज्ञ लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
WMO महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा है कि देशों को संभावित रूप से मजबूत अल नीनो के प्रभावों—जैसे सूखा, भारी बारिश और हीटवेव—के लिए पहले से तैयारी करनी चाहिए।
भारत ने शुरू की तैयारी
संभावित मौसमी जोखिमों को देखते हुए केंद्र सरकार और कृषि मंत्रालय ने खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। विभिन्न राज्यों के साथ समन्वय कर ऐसी रणनीति बनाई जा रही है, जिससे किसानों को बुवाई और सिंचाई से जुड़ी चुनौतियों का सामना कम करना पड़े।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि मानसून की अंतिम तस्वीर अगले कुछ हफ्तों में और साफ होगी, इसलिए फिलहाल सतर्कता के साथ हालात पर नजर रखना जरूरी है।
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