
ढाका। भारत (India) से न्योता मिलने के बावजूद पहले चीन जाने की तैयारी कर रहे बांग्लादेशी PM तारिक रहमान (Bangladeshi PM Tariq Rahman) ने प्लान बदल दिया है। खबर है कि अब वह इस दुविधा से बचने के लिए तीसरे देश की यात्रा पहले करने जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इसकी वजह है कि वह ऐसा कोई संकेत नहीं देना चाहते कि जिससे बांग्लादेश का झुकाव किसी एक देश के प्रति लगे। हालांकि, कहा जा रहा है कि इसके बाद वह चीन यात्रा कर सकते हैं, जहां तीस्ता नदी (Teesta River) का मुद्दा चर्चा में उठ सकता है।
सबसे पहले भारत ने भी दिया था न्योता
फरवरी में बांग्लादेश चुनाव के बाद सबसे पहले भारत ही था, जिसने रहमान को यात्रा का न्योता दिया था। बाद में मलेशिया और फिर इसके बाद चीन की तरफ से न्योता गया था। अब खास बात है कि बांग्लादेश पहले चीन जाने की तैयारी करने लगा था, लेकिन लंबी चर्चाओं के बाद मलेशिया पर मुहर लगी।
एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि किसी एक और झुकाव के संकेत से बचने के लिए रहमान मलेशिया जा रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने चीन के न्योते को नजरअंदाज करने का फैसला कर लिया है। इससे पहले वह 20 से 26 जून के बीच चीन जाने की योजना बना रहे थे। जबकि, भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से उन्हें न्योता दिया जा चुका है।
भारत को नाराज नहीं करना चाहता बांग्लादेश?
प्रथम अलो की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि सरकार पीएम की पहली यात्रा किस देश होगी, यह तय करने के लिए काफी सतर्क थी। सूत्रों का कहना था कि भारत और चीन के बीच क्षेत्रीय जियो पॉलिटिक्स और कॉम्पिटिशन को देखते हुए चर्चा में किसी तीसरे देश की यात्रा पर ज्यादा खुलकर चर्चा हुई।
दरअसल, जानकारों का यह भी कहना है कि पीएम की पहली यात्रा नई सरकार की विदेश नीति की प्राथमिकताओं को दिखाने का जरिया था। इस लिहाज से रहमान की मलेशिया यात्रा को संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि भारत और चीन के बीच बढ़ते मुकाबले और बदलती दुनिया को देखते हुए बांग्लादेश के लिए यह बहुत जरूरी है कि वह दोनों देशों के साथ अपने रिश्तों में तालमेल बनाकर रखे।
चीन का न्योता छोड़ दूसरा देश क्यों चुना
डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, पीएम रहमान अपनी पहली विदेश यात्रा पर 21 और 22 जून को मलेशिया जा सकते हैं। बांग्लादेश के विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि यह रुख BNP के संतुलन की नीति की ओर इशारा कर रहा है। कहा जा रहा है कि चीन से पहले मलेशिया जाने का फैसला वैश्विक माहौल और क्षेत्रीय स्थिति को देखते हुए लिया गया है। मलेशिया के अलावा उनके पहले यात्रा स्थान के तौर पर भूटान या सऊदी अरब का नाम भी था।
बांग्लादेशी न्यूज वेबसाइट से बातचीत में एक सरकारी अधिकारी ने कहा था, ‘ईद से कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री ने चीन से पहले मलेशिया जाने में दिलचस्पी दिखाई थी।’ वहीं, उनसे पहले विदेश मंत्री खलील-उर-रहमान भारत और चीन की यात्रा कर चुके हैं। विदेश मंत्रालय का कहना है कि फिलहाल दोनों यात्राओं की तैयारियां जारी हैं, लेकिन एजेंडा तय नहीं हो सका है।
इस मामले में चीन का बेहद करीबी बांग्लादेश
चीन, बांग्लादेश का सबसे बड़ा आयात स्त्रोत है। आंकड़े बताते हैं कि दोनों के बीच वार्षिक लेन देन 25 बिलियन डॉलर का है। साथ ही चीन ने बांग्लादेश में इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी धन निवेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि आवामी लीग की सरकार गिरने के बाद नए प्रोजेक्ट्स में चीन की तरफ से निवेश आना कम हो गया है।
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