
नई दिल्ली. अमेरिका-इजरायल (US-Israel) और ईरान (Iran) की जंग में खाड़ी देशों (Gulf nations) का तगड़ा नुकसान हुआ है. अब इसकी भरपाई के लिए अमेरिका नए प्लान (plan) पर काम कर रहा है. इसमें ईरानी हमलों में खाड़ी देशों को पहुंचे नुकसान की कीमत अप्रत्यक्ष रूप से ईरान से ही वसूली जाएगी.
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी (वित्त मंत्री) स्कॉट बेसेंट ने अपनी टीम को खाड़ी देशों (अमेरिका के सहयोगियों) की स्थिति और ईरान द्वारा पहुंचाए गए नुकसान की लागत का आकलन करने का निर्देश दिया है.
अमेरिका ऐसा रास्ता तलाश रहा है जिससे ईरान के वे पैसे, जो प्रतिबंधों की वजह से फ्रीज हैं, खाड़ी देशों को दिए जा सकें. मकसद यह है कि अगर भविष्य में ईरान की तरफ से कोई हमला होता है और नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई इन पैसों से की जा सके. अमेरिका यह भी देख रहा है कि क्या इन फंड्स का इस्तेमाल पहले हुए नुकसान और तबाही की मरम्मत के लिए किया जा सकता है.
अगर ऐसा सच में होता है तो ईरान और भड़क सकता है. दरअसल, दोनों देशों के बीच जो शांति समझौता रुका हुआ है उसमें से एक शर्त फ्रीज की गई संपत्ति की भी है. ईरान चाहता है कि अमेरिका इस फ्रीज संपत्ति को रिलीज कर दे.
ईरान की तरफ से शुक्रवार को भी कहा गया था कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौता इस बात पर निर्भर करता है कि क्या ट्रंप प्रशासन ईरान की 24 अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्ति को जारी करने पर सहमत होता है या नहीं. साथ ही चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने फिर से लड़ाई शुरू की, तो वह ‘एक अंधेरे रास्ते’ पर चला जाएगा.
सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मोहसेन रेजाई ने CNN को दिए इंटरव्यू में कहा था कि अगर ट्रंप प्रशासन ये फंड जारी करता है, तो यह ईरान और अमेरिका के भविष्य के लिए ‘एक नई शुरुआत’ होगी. उन्होंने कहा, ‘अगर वह (ट्रंप) ईरान के साथ कोई समझौता करना चाहते हैं, तो यह 24 अरब डॉलर उस भरोसे की परीक्षा है जो ईरान, ट्रंप के साथ कायम करना चाहता है. यह एक ऐसी परीक्षा है जिसमें अमेरिका को सफल होना होगा और इससे आगे का रास्ता खुलेगा.’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह हमारा अपना पैसा है, अमेरिका का नहीं.’
क्या है ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति
Iranian frozen assets या Iranian assets ईरान की वह संपत्ति है जिस पर अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान की पहुंच रुकी हुई है. ज्यादातर ईरानी फंड अमेरिका में नहीं, बल्कि दूसरे देशों में फंसे हुए हैं, जैसे दक्षिण कोरिया, इराक, चीन, जापान, कतर आदि.
इसमें विदेशी बैंकों में जमा ईरान के डॉलर और विदेशी मुद्रा भंडार, तेल बेचकर कमाई गई रकम, कुछ रियल एस्टेट और अन्य संपत्तियां, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी संपत्तियां आदि शामिल हैं.
दरअसल, अमेरिकी हमलों का बदला लेने के लिए ईरान खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है. इसमें ईरान की तरफ से सऊदी अरब, UAE, कुवैत, बहरीन पर अटैक हुए. ईरान का कहना है कि ये हमले वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य बेसों पर हैं. लेकिन खाड़ी देशों का दावा है कि एयरपोर्ट, तेल भंडारण सुविधा, पेट्रोकेमिकल प्लांट तक निशाने पर रहे.
इन्हीं ताजा हमलों के बाद ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों का इस्तेमाल खाड़ी सहयोगी देशों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए करने पर विचार किया जा रहा है.
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