
नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतें हमेशा से राजनीति और आम लोगों की चर्चा का बड़ा विषय रही हैं. इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ईंधन कीमतों को लेकर सरकार का बचाव करते हुए दावा किया है कि दिल्ली में पेट्रोल आज चार साल पहले की तुलना में सस्ता है. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान संकट जैसे बड़े वैश्विक झटकों के बावजूद सरकार ने आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया.
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने ऐसे ऊर्जा संकट देखे हैं, जिनकी पहले कभी कल्पना नहीं की गई थी. फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ और फिर फरवरी 2026 में ईरान से जुड़े संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया. उन्होंने कहा कि ये घटनाएं भारत की वजह से नहीं हुईं, लेकिन इनके असर से पूरी दुनिया जूझ रही है. इसके बावजूद भारत ने स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला और घरेलू बाजार को बड़े झटकों से बचाने में सफलता हासिल की.
ईंधन कीमतों को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर सवाल उठाता रहा है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पुरी ने कहा कि कई विपक्ष शासित राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भाजपा शासित राज्यों की तुलना में अधिक हैं. उनके अनुसार, इसका मुख्य कारण राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स है. उन्होंने कहा कि केवल केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. मंत्री का मानना है कि राज्यों की कर नीति भी ईंधन कीमतों को प्रभावित करती है और इस पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
मंत्री ने उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें कहा जाता है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें चुनावों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं. उन्होंने कहा कि 2024 के आम चुनावों के साथ-साथ कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हुए, लेकिन उस दौरान ईंधन कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई. उनके अनुसार, सरकार का उद्देश्य राजनीतिक लाभ नहीं बल्कि बाजार की परिस्थितियों और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेना है. उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की है.
पुरी ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. पहले जहां ऊर्जा आपूर्ति के सीमित स्रोत थे, वहीं अब भारत दुनिया के 41 देशों से तेल और गैस खरीद रहा है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक पहल का भी उल्लेख किया और कहा कि विभिन्न देशों के साथ बेहतर संबंधों ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाने में मदद की है. विविध स्रोतों से खरीदारी के कारण किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर भी भारत को बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा.
मंत्री ने बताया कि भारत के कच्चे तेल और एलपीजी आयात का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है. जब इस क्षेत्र में बाधाएं पैदा हुईं, तब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ गया था. इसके बावजूद भारत ने आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखा और कीमतों को नियंत्रित रखने का प्रयास किया. उन्होंने माना कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हुआ, लेकिन सरकार ने उसके पूरे असर को आम लोगों तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की.
हरदीप पुरी ने कहा कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है. उनके अनुसार, कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद सरकार ने ऐसी नीतियां अपनाईं जिनसे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम से कम पड़े. उन्होंने दावा किया कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत की स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर हुई है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं, लेकिन सरकार का मानना है कि मजबूत रणनीति, विविध ऊर्जा स्रोतों और बेहतर प्रबंधन के दम पर देश भविष्य की चुनौतियों का भी सामना करने में सक्षम रहेगा.
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