मिनिमर्ग (द्रास)। हिमालय की कठिन और दुर्गम पहाड़ियों के बीच बन रही जोजिला सुरंग परियोजना (Zozilla Tunnel Project) ने एक बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। कश्मीर के सोनमर्ग को लद्दाख (Ladakh to Sonmarg in Kashmir) के मिनिमर्ग से जोड़ने वाली इस महत्वाकांक्षी सुरंग के दोनों सिरों को सफलतापूर्वक जोड़ दिया गया है। अंतिम चट्टानी हिस्से को विस्फोट के जरिए हटाकर सुरंग निर्माण का महत्वपूर्ण “ब्रेकथ्रू” हासिल किया गया, जिसे भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और रणनीतिक मजबूती के लिहाज से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
करीब 13.15 किलोमीटर लंबी यह सुरंग पूरी होने के बाद एशिया की सबसे लंबी द्विदिशीय सिंगल-ट्यूब सड़क सुरंगों में शामिल होगी। परियोजना के अभियंताओं के अनुसार फिलहाल लगभग 80 से 85 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और आने वाले दो से ढाई वर्षों में इसे आवागमन के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है।
सालभर बना रहेगा लद्दाख से संपर्क
जोजिला दर्रा भारी बर्फबारी के कारण हर साल कई महीनों तक बंद रहता है, जिससे लद्दाख का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से प्रभावित होता है। सुरंग के शुरू होने के बाद कश्मीर और लद्दाख के बीच सालभर सड़क संपर्क बना रहेगा। इससे स्थानीय निवासियों को राहत मिलने के साथ ही सेना की आवाजाही और रसद आपूर्ति भी आसान हो जाएगी।
सामरिक दृष्टि से यह परियोजना काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि लद्दाख क्षेत्र चीन और पाकिस्तान की सीमाओं के नजदीक स्थित है। सर्दियों के दौरान अब तक सेना को कई बार हवाई मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन सुरंग चालू होने के बाद हर मौसम में निर्बाध परिवहन संभव हो सकेगा।
क्या होता है ‘ब्रेकथ्रू’?
सुरंग निर्माण में “ब्रेकथ्रू” उस चरण को कहा जाता है, जब दोनों ओर से खुदाई कर रही टीमें एक निर्धारित बिंदु पर आकर मिलती हैं। जोजिला परियोजना में अंतिम 2.5 मीटर चट्टानी हिस्से को तोड़कर यह चरण पूरा किया गया। अधिकारियों के मुताबिक यह उपलब्धि तय समय से पहले हासिल हुई है।
कठिन परिस्थितियों में हुआ निर्माण
परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि बेहद चुनौतीपूर्ण भूगर्भीय परिस्थितियों और मौसम के बीच काम करना आसान नहीं था। कई बार हिमस्खलन जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन सुरक्षा मानकों और तकनीकी योजना के साथ काम जारी रखा गया।
इस परियोजना में आधुनिक न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सुरंग में अत्याधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, रेडियो संचार व्यवस्था, स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम और निर्बाध बिजली आपूर्ति जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि सुरंग केवल सामरिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी गेम चेंजर साबित होगी। अभी मौसम की वजह से कई महीनों तक लद्दाख की आवाजाही प्रभावित रहती है, लेकिन सुरंग बनने के बाद देश-दुनिया से आने वाले पर्यटक सालभर यात्रा कर सकेंगे।
साथ ही, स्थानीय लोगों को राशन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता में भी आसानी होगी। परियोजना को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
ऐसी होगी जोजिला सुरंग
जोजिला सुरंग लगभग 13.153 किलोमीटर लंबी, 9.5 मीटर चौड़ी और 7.57 मीटर ऊंची होगी। यह मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के बालटाल क्षेत्र को लद्दाख के द्रास जिले के मिनिमर्ग से जोड़ेगी। परियोजना के तहत करीब 18 किलोमीटर लंबी संपर्क सड़कें और अन्य पुल भी विकसित किए जा रहे हैं। पूरी परियोजना की कुल लंबाई लगभग 31 किलोमीटर होगी।
निर्माण एजेंसियों के मुताबिक, सिविल कार्यों के बाद विद्युत और तकनीकी सुविधाओं का काम पूरा किया जाएगा और लक्ष्य है कि फरवरी 2028 तक इस सुरंग को यातायात के लिए शुरू कर दिया जाए।
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