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जोधपुर में बिजली और पानी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है – पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत

June 13, 2026


जयपुर/जोधपुर । पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Former Chief Minister Ashok Gehlot) ने कहा कि जोधपुर में बिजली और पानी की व्यवस्था (Electricity and Water Supply systems in Jodhpur) पूरी तरह चरमरा गई है (Have completely Collapsed) ।


  • उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर जोधपुर में चरमराई बिजली-पानी व्यवस्था, राजीव गांधी लिफ्ट परियोजना (फेज-3) में आ रही अड़चनों और शहर में लागू की गई धारा 163 (पूर्ववर्ती धारा 144) को लेकर सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त किया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाते हुए लिखा कि जोधपुर से स्थानीय सांसद के केंद्र में मंत्री होने तथा इसी जिले से राज्य के कानून मंत्री (जोगाराम कुमावत) होने के बावजूद भाजपा सरकार यहां की जनता के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा, “आज जोधपुर की बिजली और पानी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। आमजन इस भीषण गर्मी में त्रस्त हैं और विकट विपदा का सामना कर रहे हैं। लेकिन सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय, जनता की आवाज को दबाने के लिए शहर में धारा 163 (पुरानी 144) लगाकर उनकी अभिव्यक्ति की आजादी को छीनने का काम कर रही है।”

    वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने सरकार की कार्यप्रणाली पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि समाचार पत्रों में सुचारू पेयजल आपूर्ति के झूठे दावे किए जा रहे हैं, जिससे धरातल पर पानी के लिए तरस रही जनता के बीच भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि इस जन-आक्रोश को दबाने के लिए प्रशासन द्वारा अंदरखाने पुलिस का पहरा लगाया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।

    अशोक गहलोत ने अपने कार्यकाल की महत्वाकांक्षी योजना ‘राजीव गांधी लिफ्ट परियोजना फेज-3’ की वर्तमान स्थिति को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तकनीकी और वित्तीय आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वित्तीय स्थिति: इस महत्वपूर्ण पेयजल प्रोजेक्ट के लिए कुल 1400 करोड़ रुपए के बजट में से 1200 करोड़ रुपए का भुगतान पहले ही किया जा चुका है, इसके बावजूद धरातल पर काम पूरी तरह ठप पड़ा है। समय सीमा में देरी: जो प्रोजेक्ट आगामी मार्च 2025 में पूरा होना निर्धारित था, उसे अब भ्रष्टाचार, अनावश्यक रूट परिवर्तन और फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन विभाग की मंजूरी) के नाम पर उलझा दिया गया है। इसके चलते अब यह प्रोजेक्ट मार्च 2027 तक के लिए संशय के घेरे में आ गया है।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने तीखे शब्दों में सरकार की वित्तीय और प्रशासनिक मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आज जनता पूछ रही है कि क्या सरकारी खजाना वाकई खाली हो चुका है या फिर भ्रष्टाचार में लिप्त भाजपा के लोग केवल अपने घर भरने में व्यस्त हैं? उन्होंने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए मांग की है कि भाजपा सरकार जनता के प्रति इन दमनकारी नीतियों को तुरंत बंद करे और संकट का सामना कर रहे नागरिकों को बिजली-पानी की उचित व्यवस्था कर जल्द से जल्द राहत प्रदान करे।

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