
जोधपुर । पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Former Chief Minister Ashok Gehlot) ने कहा कि ऊपर से दबाव डालकर (Due to pressure from Above) निर्दोष लोगों को गिरफ्तार करवाया जा रहा है (Innocent people are being Arrested) ।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए वर्तमान भाजपा सरकार, मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखे प्रहार किए । प्रधानमंत्री के प्रस्तावित राजस्थान दौरे से पहले गहलोत ने रिफाइनरी परियोजना की व्यवस्थाओं को लेकर सरकार को सचेत किया है। इसके साथ ही, उन्होंने प्रदेश की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में आईओ (जांच अधिकारी) के मना करने के बावजूद ऊपर से दबाव डालकर निर्दोष लोगों को गिरफ्तार करवाया जा रहा है। प्रधानमंत्री के दौरे से पहले मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव खुद करें रिफाइनरी की मॉनिटरिंग, दोबारा न हो बदनामी । अशोक गहलोत ने बाड़मेर रिफाइनरी परियोजना को लेकर राज्य सरकार को पूरी तैयारी रखने की सलाह दी है।
गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे से पहले मुख्यमंत्री को तीन-चार दिन पहले और मुख्य सचिव को कम से कम दो दिन पहले मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेना चाहिए। दो-तीन दिन लगातार ट्रायल करवाकर सभी तकनीकी खामियां दूर की जानी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि पिछली बार प्रधानमंत्री के दौरे से पहले रिफाइनरी परिसर में आग लगने की घटना हुई थी, जिससे पूरे राजस्थान की बदनामी हुई थी। इस बार ऐसी कोई चूक नहीं होनी चाहिए और सरकार को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।
रिफाइनरी के इतिहास को रेखांकित करते हुए गहलोत ने भाजपा पर परियोजना को जानबूझकर अटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली के विशेष सहयोग से इस रिफाइनरी को मंजूरी मिली थी। गहलोत ने आरोप लगाया कि बाद में आई भाजपा सरकार ने इस परियोजना को 5 साल तक रोके रखा। इसके कारण जो रिफाइनरी लगभग 37 हजार करोड़ रुपये में बननी थी, उसकी लागत अब बढ़कर करीब 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने मांग की कि जब प्रधानमंत्री मंच पर आएं, तो जनता को बताएं कि इस देरी और बढ़ी हुई लागत की जिम्मेदारी किसकी है?
प्रदेश की कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की मौजूदा स्थिति पर गहलोत ने अब तक का सबसे बड़ा बयान दिया है। गहलोत ने कहा, “प्रदेश में एसीबी पूरी तरह से सीएमओ और सीएम के दबाव में काम कर रही है। जब से नए डीजी साहब आए हैं, हालात भयानक खराब हैं। आईओ (जांच अधिकारी) कहता है कि इस व्यक्ति के खिलाफ कोई केस नहीं बनता, यह मुल्जिम नहीं है, लेकिन ऊपर से डीजी साहब और राजनीतिक दबाव आता है कि इसे अरेस्ट करो।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “आईओ के मना करने के बावजूद गिरफ्तारियां हो रही हैं, जिनमें महेश जोशी भी शामिल हैं। वे ऑलरेडी पहले ही वैसे ही एक केस में अरेस्ट हो चुके थे, यहाँ उन्हें वापस अरेस्ट कर लिया गया। क्या मजाक बना रखा है?” गहलोत ने कहा कि उन्होंने तीन बार मुख्यमंत्री रहते हुए कभी एसीबी के काम में ऐसी ‘पंचायत’ नहीं देखी।
गहलोत ने मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के पीछे कोई और शक्ति काम कर रही है। पूर्व सीएम ने कहा, “शायद ऊपर से आरएसएस वालों का दबाव आता है और आरएसएस का दबाव आते ही मुख्यमंत्री हथियार डाल देते हैं। यह सरकार तो सिर्फ एक मुखौटा है, असली राज पीछे से आरएसएस वाले कर रहे हैं। राज्य में जितने भी ट्रांसफर, पोस्टिंग और करप्शन हो रहे हैं, उन सबके डायरेक्शन वहीं से आ रहे हैं।” राजस्थान के हालातों को गंभीर बताते हुए गहलोत ने दावा किया कि प्रदेश की जनता बेहद जागरूक है। भाजपा चाहे अपना मुख्यमंत्री ही क्यों न बदल दे, तब भी कुछ होने वाला नहीं है; अगली बार प्रदेश में सरकार बदल कर रहेगी।
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