
नई दिल्ली । केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह (Union Minister of State Dr. Jitendra Singh) ने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति का आकलन उसके सामाजिक और आर्थिक असर के आधार पर किया जाना जरूरी (It is essential to assess Scientific Progress based on its Social and Economic Impact) ।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रयोगशालाओं, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इनोवेशन (नवाचार) केवल ‘प्रूफ-ऑफ-कांसेप्ट’ (अवधारणा की पुष्टि) के चरण से आगे बढ़ें और बड़े पैमाने पर अंतिम उपयोगकर्ताओं तक पहुंचें। भारत अब ऐसे दौर में आ गया है जहां वैज्ञानिक प्रगति का आकलन उसके सामाजिक और आर्थिक असर के आधार पर किया जाना जरूरी है। इनोवेशन के लिए अनुकूल माहौल बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्योग प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित अनुसंधान संस्थानों के साथ काम करने में आने वाली चुनौतियों के बारे में खुलकर बात करें।
बेंगलुरु में ‘आरआईएसई कॉन्क्लेव 2026’ के दौरान उद्योग के साथ बातचीत के एक सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित अनुसंधान के माध्यम से विकसित स्वदेशी तकनीकों तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि सीएसआईआर टेक्नोलॉजी शोकेस पोर्टल पर अभी 800 से ज्यादा तकनीकें मौजूद हैं। यह पोर्टल उद्योगों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स को अपनी जरूरतों के हिसाब से समाधान खोजने और तकनीक को अपनाने की प्रक्रिया तेज करने के लिए एक तैयार मंच प्रदान करता है। डॉ. सिंह ने कहा कि उद्योग के साथ सहयोग अनुसंधान परियोजनाओं की योजना बनाने के चरण से ही शुरू होना चाहिए न कि तकनीक के पूरी तरह विकसित हो जाने के बाद।
उन्होंने कहा कि इस तरह की शुरुआती भागीदारी से वैज्ञानिक कार्यों को बाजार की जरूरतों के अनुरूप बनाने, तकनीक के हस्तांतरण को आसान बनाने और व्यावसायिक सफलता की संभावनाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने वैज्ञानिक ज्ञान को बाजार के लिए तैयार समाधानों और राष्ट्रीय विकास के परिणामों में बदलने की गति बढ़ाने के लिए अनुसंधान संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक निवेश से विकसित अत्याधुनिक सुविधाओं का इस्तेमाल उभरते क्षेत्रों में काम करने वाले इनोवेटर्स और उद्योगों के लिए साझा मंच के तौर पर किया जाना चाहिए।
मंत्री ने लिथियम बैटरी बनाने वाली एक ऐसी सुविधा का उदाहरण दिया, जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग 1,000 सेल प्रतिदिन है। इससे पता चलता है कि वैज्ञानिक बुनियादी ढांचा कैसे स्थापित उद्योगों और उभरते उद्यमों दोनों को स्वदेशी तकनीकी क्षमताएं विकसित करने में मदद कर सकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए विशेष इनक्यूबेशन सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं।
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