
नई दिल्ली। भगवान शिव (Lord Shiva) को समर्पित पवित्र श्रावण मास (Sawan Month) का शुभारंभ आज, 30 जुलाई से हो गया है। यह पावन महीना 28 अगस्त तक चलेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन का पूरा महीना शिव आराधना, व्रत, जप-तप और जलाभिषेक के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और “हर-हर महादेव” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
आज जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त
सावन के पहले दिन भगवान शिव का अभिषेक करने के लिए कई शुभ समय निर्धारित हैं—
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:36 बजे से 5:24 बजे तक
प्रातः संध्या मुहूर्त: सुबह 4:39 बजे से 5:41 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:20 बजे से 1:12 बजे तक
विजय मुहूर्त: शाम 4:28 बजे से 5:29 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 5:32 बजे से रात 8:30 बजे तक
पहले दिन बन रहे हैं कई शुभ योग
श्रावण मास के प्रथम दिन श्रवण नक्षत्र, आयुष्मान योग, शश महापुरुष राजयोग, हंस राजयोग और गुरु-आदित्य राजयोग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन योगों में शिव पूजा और जलाभिषेक अत्यंत शुभ माना जाता है।
सावन सोमवार की तिथियां
3 अगस्त – पहला सावन सोमवार
10 अगस्त – दूसरा सावन सोमवार
17 अगस्त – तीसरा सावन सोमवार
24 अगस्त – चौथा सावन सोमवार
ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर शुद्ध जल, गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद चंदन, अक्षत, शहद और आंकड़े के फूल अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर शिव चालीसा, रुद्राष्टकम का पाठ करें तथा ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। अंत में फल या पंचामृत का भोग लगाकर आरती करें।
सावन में क्या करें
– प्रतिदिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।
– सात्विक भोजन का पालन करें।
– जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान दें।
– नियमित रूप से ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें।
इन बातों से करें परहेज
– मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और बासी भोजन का सेवन न करें।
– बाल, दाढ़ी और नाखून कटवाने से बचें।
– किसी का अपमान न करें और घर में विवाद से दूर रहें।
– पूरे महीने मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखें।
सावन का धार्मिक महत्व
हिंदू परंपरा में सावन को भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने ग्रहण कर संसार की रक्षा की थी। विष की ज्वाला शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था। तभी से सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है।
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