
आईजोल। मिजोरम (Mizoram) की एक जिला अदालत (District Court) ने 9 साल पुराने एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने 2017 में एक स्थानीय आदिवासी महिला (Local tribal woman) के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उस पर एसिड से हमला करने के मामले में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के दो जवानों को कठोर कारावास की सजा सुनाई है। आइजोल की अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश सिल्वी जोमुआनपुई राल्ते ने दोनों जवानों को गैंगरेप का दोषी करार दिया।
मामला 2017 का है। पीड़िता 16 जुलाई 2017 को अपनी एक सहेली के साथ भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित ममित जिले में गस्काटा नदी के घने जंगलों में जंगली सब्जियां इकट्ठा करने गई थी। उसी दौरान, स्थानीय बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) पर तैनात बीएसएफ जवान नीलांजन दास और दिनेश कुमार ने दोनों महिलाओं को घेर लिया। जवानों ने एक महिला के साथ जबरन दुष्कर्म किया। इसके बाद अपनी पहचान छिपाने और पीड़िता को अंधा बनाने के मकसद से उसके चेहरे पर एसिड फेंक दिया।
सहेली की संदिग्ध मौत
इस भयानक हमले में पीड़िता किसी तरह जिंदा तो बच गई, लेकिन उसका चेहरा हमेशा के लिए बिगड़ गया और उसकी आंखों की रोशनी भी चली गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि हमले के दौरान उसकी सहेली रहस्यमय तरीके से लापता हो गई थी। घटना के 11 दिन बाद स्थानीय विलेज डिफेंस पार्टी और राज्य पुलिस की गहन तलाशी के बाद जंगल से उसकी बुरी तरह सड़ चुकी लाश बरामद हुई। कोर्ट के सामने यह साबित करने की पूरी कोशिश की गई कि उसकी हत्या की गई थी। हालांकि अदालत ने पुख्ता सबूत न होने के कारण दोनों जवानों को हत्या के आरोपों से बरी कर दिया था।
कैसे कसा शिकंजा?
दोषियों का पता लगाना आसान नहीं था। शुरुआती जांच के दौरान राज्य पुलिस को बीएसएफ के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने कथित तौर पर जवानों को गिरफ्तार करने और डीएनए जांच के लिए उनके बायोलॉजिकल सैंपल देने का भी विरोध किया था। हालांकि कई संगठनों और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के इस मामले में दखल के बाद अधिकारी जांच के लिए राजी हुए। इसके बाद बॉर्डर आउटपोस्ट के आधिकारिक ड्यूटी रोस्टर की जांच की गई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि घटना के समय के दोनों जवान उसी इलाके में थे। वहीं आइजोल में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट की देखरेख में आयोजित ‘टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड’ के दौरान पीड़िता ने दोषियों की पहचान की।
कोर्ट ने सुनाया फैसला
जांच में सामने आए तथ्यों, 18 गवाहों के बयानों और फुल्दुंगसेई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की प्राथमिक मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने दोनों जवानों को दोषी माना। अदालत ने दोनों जवानों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत अलग-अलग मामलों में कुल मिलाकर 42 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसमें गैंगरेप के लिए 20 साल की कठोर कारावास, एसिड अटैक के लिए 12 साल की कठोर कारावास, और गंभीर शारीरिक चोट पहुंचाने के लिए के 10 साल की कठोर कारावास की सजा शामिल है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर हर अलग-अलग अपराध के लिए 60-60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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