
एवियन (फ्रांस) । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कहा कि होर्मुज में समुद्री व्यापार बाधित होने से (Disruption of maritime trade in Hormuz) वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा (Harmed the Global Economy) ।
उन्होंने कहा, ” होर्मुज में समुद्री व्यापार बाधित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। अंतरराष्ट्रीय साझेदारी तभी सार्थक हो सकती है जब सभी देश साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें।” प्रधानमंत्री ने कहा, ” भारत का मानना है कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनाव और संघर्षों का स्थायी समाधान केवल संवाद, कूटनीति और सहयोग से ही संभव है।” उन्होंने आगे कहा, ” कई भारतीय नागरिकों ने इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई है, और समुद्री व्यापार से जुड़े नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है।”
पीएम मोदी ने कहा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहना चाहिए, ताकि नाविक बिना किसी भय के अपना कार्य कर सकें। उन्होंने कहा कि भारत इन मुद्दों पर सभी साझेदार देशों के साथ काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि अनिश्चित वैश्विक माहौल में व्यापार और तकनीक का दुरुपयोग बढ़ रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वास की कमी पैदा हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया में संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन विश्वास की कमी सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि साझेदारियों का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि देशों के बीच भरोसा कितनी मजबूती से दोबारा स्थापित किया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को फ्रांस के एवियन में आयोजित ग्रुप ऑफ सेवन (जी7) शिखर सम्मेलन में “संतुलित, समावेशी और सतत आर्थिक विकास” पर आधारित एक कार्य सत्र में भाग लिया। इस सत्र से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व के कई बड़े नेताओं से मुलाकात की, जिनमें इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमए) की कार्यकारी निदेशक क्रिस्टालिना जियोरगीवा शामिल रहे। मंगलवार को पीएम आउटरीच सेशन का हिस्सा बने थे। इस दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत किया और कहा कि यह संघर्ष मित्र देशों में जान-माल की भारी हानि का कारण बना है।
उन्होंने भारत की “वसुधैव कुटुंबकम” की सोच को लेकर कहा, ” भारत हमेशा “मानवता पहले” के सिद्धांत पर काम करता रहा है और विकास तभी सबसे सार्थक होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो।” उन्होंने कहा, “आज आपसी भरोसा सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति है। दुख की बात यह है कि दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है। हमारी साझेदारियों का भविष्य इसी बात पर निर्भर करेगा कि हम इस भरोसे को फिर से कैसे मजबूत करते हैं।”
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