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सिर्फ 10 दिन का तेल भंडार, आयात पर भारी निर्भरता के बीच भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती

June 18, 2026

नई दिल्ली। भारत अपनी ऊर्जा (Energy) जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी तेल पर निर्भर है, लेकिन रणनीतिक तेल भंडारण के मामले में देश अभी भी कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं से काफी पीछे है। ऊर्जा क्षेत्र के वैश्विक थिंक टैंक काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत के पास मौजूद रणनीतिक कच्चे तेल का भंडार देश की जरूरतों को केवल 9 से 10 दिनों तक ही पूरा कर सकता है।

जापान और दक्षिण कोरिया से काफी पीछे भारत

रिपोर्ट के अनुसार, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के पास 200 दिनों से अधिक की जरूरत के बराबर रणनीतिक तेल भंडार मौजूद हैं। इसके मुकाबले भारत का भंडारण स्तर काफी कम है, जबकि देश अपनी कुल तेल आवश्यकता का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकट या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में सीमित भंडारण क्षमता भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

छह देशों पर टिकी है तेल आपूर्ति

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल केवल छह देशों से आता है। इनमें रूस और पश्चिम एशिया के प्रमुख तेल उत्पादक देश शामिल हैं। ऐसे में यदि किसी कारण से इन क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है या आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।

गैस भंडारण की भी कमी

रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई है कि देश के पास प्राकृतिक गैस की जरूरतों के लिए कोई समर्पित रणनीतिक भंडारण व्यवस्था नहीं है। इससे उर्वरक उद्योग, बिजली उत्पादन और सिटी गैस वितरण नेटवर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर जोखिम बढ़ जाता है।



  • आम लोगों पर पड़ सकता है असर

    सीईईडब्ल्यू के विशेषज्ञ हेमंत माल्या के अनुसार, कच्चे तेल, एलएनजी, एलपीजी, कोयला या प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर पड़ सकता है।

    उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में रसोई गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं, ईंधन महंगा हो सकता है, उर्वरक सब्सिडी पर दबाव बढ़ सकता है और महंगाई में भी तेजी आ सकती है।

    ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत

    विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती ऊर्जा मांग और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए भारत को अपने रणनीतिक तेल और गैस भंडार को और मजबूत करने की आवश्यकता है। इससे आपूर्ति संकट की स्थिति में देश को राहत मिलेगी और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर को कम किया जा सकेगा।

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