तेहरान। अमेरिका और ईरान (US and Iran) के बीच हाल ही में हुए युद्धविराम समझौते पर संकट (Crisis over ceasefire agreement) के बादल मंडराने लगे हैं। समझौते के कुछ ही समय बाद ईरान ने एक बार फिर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद रखने का ऐलान कर दिया है। ईरान का आरोप है कि इजरायल लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रखकर समझौते की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव दोबारा बढ़ गया है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने समुद्री संचार चैनलों के माध्यम से जारी बयान में कहा कि जब तक समझौते की प्रमुख शर्तों का पालन नहीं किया जाता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला जाएगा। ईरानी पक्ष का कहना है कि लेबनान से इजरायली सेना की वापसी, नौसैनिक नाकेबंदी का अंत और क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी कम करना समझौते का अहम हिस्सा था।
पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुए समझौते को क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा था। लेकिन ईरान का दावा है कि समझौते के बावजूद न तो इजरायल ने अपनी सैन्य गतिविधियां रोकी हैं और न ही अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी कम की है।
ईरान ने आरोप लगाया है कि इन परिस्थितियों में समझौते की भावना कमजोर पड़ रही है और इसलिए होर्मुज को खोलने का कोई औचित्य नहीं बचता।
दूसरी ओर इजरायल ने साफ संकेत दिए हैं कि वह दक्षिणी लेबनान से पीछे हटने वाला नहीं है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि देश की सुरक्षा को देखते हुए इजरायली सेना वहां अपनी मौजूदगी बनाए रखेगी। उनका कहना है कि सीमा क्षेत्र में सुरक्षा जोन बनाए रखना आवश्यक है और जब तक खतरा बना रहेगा, सेना की तैनाती जारी रहेगी।
नेतन्याहू के इस रुख को ईरान ने समझौते के खिलाफ कदम बताया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब समझौते के बाद भी लेबनान में सैन्य झड़पें और हवाई हमले जारी हैं।
लेबनान के नबातियेह क्षेत्र में हाल में हुए इजरायली हमलों में कई लोगों के मारे जाने और दर्जनों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं। वहीं इजरायली सेना का दावा है कि उसने हिजबुल्लाह से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया है। इजरायल का कहना है कि उसकी कार्रवाई सुरक्षा जरूरतों के तहत की जा रही है।
घटनाक्रम ने अमेरिका और इजरायल के शीर्ष नेतृत्व के बीच भी मतभेद उजागर कर दिए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप कथित तौर पर लेबनान में सैन्य अभियान रोकने के पक्ष में हैं, जबकि नेतन्याहू सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे। अमेरिकी प्रशासन के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी संकेत दिए हैं कि केवल सैन्य कार्रवाई से क्षेत्रीय समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। युद्ध और नाकेबंदी की आशंकाओं के कारण पहले भी वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ चुकी है। भारत सहित कई ऊर्जा आयातक देशों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्षेत्र में तनाव कम होता है या होर्मुज को लेकर नया संकट गहराता है।
ईरान के ताजा रुख ने यह संकेत दे दिया है कि शांति प्रक्रिया अभी भी बेहद नाजुक स्थिति में है और किसी भी नई सैन्य कार्रवाई से पूरा समझौता खतरे में पड़ सकता है।
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