
मुंबई । शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे (Shiv Sena (UBT) MLA Aaditya Thackeray) ने कहा कि बागी सांसद इस्तीफा देकर (Rebel MPs should Resign) दोबारा चुनाव लड़ें (Contest Elections Again) ।
शिवसेना (यूबीटी) के विधायक एवं पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने उन सांसदों पर निशाना साधा, जिन्होंने कथित तौर पर पार्टी छोड़कर दूसरी राजनीतिक राह चुनी है। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जिन सांसदों ने पाला बदला है, उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर जनता के बीच दोबारा जाना चाहिए। आदित्य ठाकरे ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन और नेतृत्व में चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो जनता का सामना करें। उनका दावा था कि उनकी पार्टी ने लोगों का विश्वास और दिल जीता है तथा जनता चुनाव के जरिए अपनी राय स्पष्ट कर देगी।
आदित्य ठाकरे ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों में विपक्ष से डर का माहौल दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पहले सांसदों को साथ ले जाने की कोशिश की जा रही है और आगे चलकर विधायकों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों को भी निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी हर परिस्थिति में संघर्ष जारी रखेगी, चाहे उसे अकेले ही क्यों न लड़ना पड़े। ठाकरे ने सवाल उठाया कि विपक्ष के नेता से इतना डर क्यों है और आखिर इस तरह की राजनीतिक गतिविधियों की जरूरत क्यों पड़ रही है।
कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य भाई जगताप ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत की संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था चुनावों पर आधारित है, जो लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उनके अनुसार यदि चुने हुए जनप्रतिनिधियों पर दबाव, डर, बल प्रयोग या जांच एजेंसियों के माध्यम से पार्टी बदलने का दबाव बनाया जाता है, तो यह असंवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
उधर, समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आज़मी ने भी ‘ऑपरेशन टाइगर’ की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की राजनीति में मतदाताओं की भावना और जनादेश की अनदेखी होती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता किसी विचारधारा और पार्टी के नाम पर वोट मांगकर जीतता है, तो बाद में पार्टी बदलना मतदाताओं के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि दलबदल करने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए पहले इस्तीफा देना और फिर दोबारा चुनाव लड़ना अनिवार्य किया जाना चाहिए। इस तरह का काम करना लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है और राजनीतिक टूट-फूट देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर रही है।
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