
नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ ऐसे गीत (Songs) हैं जो समय के साथ पुराने नहीं होते, बल्कि हर पीढ़ी के बीच अपनी लोकप्रियता बनाए रखते हैं। वर्ष 1977 में रिलीज हुई फिल्म ‘इनकार’ (Inkaar) का मशहूर गीत ‘मुंगड़ा-मुंगड़ा’ (Mungda Mungda) भी ऐसे ही सदाबहार गीतों में शामिल है। यह गीत आज भी शादी-पार्टियों, सांस्कृतिक आयोजनों (Cultural Events) और डांस मंचों पर सुनाई देता है। दशकों बाद भी इसकी लोकप्रियता बरकरार है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस गीत को गुनगुनाने वाले अधिकांश लोग इसके सबसे महत्वपूर्ण शब्द ‘मुंगड़ा’ (Mungda) का वास्तविक अर्थ नहीं जानते।
यह गीत अपने चटपटे बोल, आकर्षक संगीत और अभिनेत्री हेलेन के दमदार प्रदर्शन के कारण बेहद लोकप्रिय हुआ था। गीत को प्रसिद्ध गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा था, जबकि इसका संगीत राजेश रोशन ने तैयार किया था। गायिका ऊषा मंगेशकर की आवाज ने इस गीत को अलग पहचान दी। फिल्म में हेलेन ने मराठी लोक संस्कृति से प्रेरित लावणी शैली में प्रस्तुति देकर इसे यादगार बना दिया था।
समय के साथ यह गीत इतना लोकप्रिय हुआ कि कई लोग ‘मुंगड़ा’ शब्द को किसी नृत्य शैली या लोक परंपरा से जोड़कर देखने लगे। हालांकि भाषा और लोक संस्कृति के जानकारों के अनुसार इसका अर्थ कुछ और ही है। मराठी बोलचाल में ‘मुंगला’ या ‘मुंगड़ा’ शब्द का संबंध बड़े चींटे से माना जाता है। यही शब्द इस गीत की पूरी अवधारणा को समझने की कुंजी भी है।
गीत के बोलों में नायिका स्वयं को ‘गुड़ की डली’ बताती है और सामने वाले को ‘मुंगड़ा’ यानी चींटे के रूप में संबोधित करती है। यह एक रूपक या प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है, जिसमें यह संदेश दिया गया है कि जिस प्रकार गुड़ की मिठास से आकर्षित होकर चींटे उसके आसपास पहुंच जाते हैं, उसी तरह प्रेम और आकर्षण की भावना लोगों को अपनी ओर खींचती है। गीत की यही रचनात्मक कल्पना इसे सामान्य डांस नंबर से अलग बनाती है।
भाषा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय लोकगीतों और फिल्मी गीतों में अक्सर क्षेत्रीय शब्दों का प्रयोग किया जाता रहा है। कई बार ये शब्द इतने लोकप्रिय हो जाते हैं कि लोग उन्हें गुनगुनाते तो हैं, लेकिन उनके वास्तविक अर्थ से अनजान रहते हैं। ‘मुंगड़ा’ भी ऐसा ही एक शब्द है, जिसने अपनी धुन और प्रस्तुति के कारण लोकप्रियता तो हासिल कर ली, लेकिन उसका मूल अर्थ आम दर्शकों तक कम ही पहुंच पाया।
फिल्म ‘इनकार’ में शामिल यह गीत उस दौर की सबसे बड़ी संगीत सफलताओं में गिना जाता है। सिनेमाघरों में इसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिला और बाद के वर्षों में भी कई फिल्मों तथा मंचीय प्रस्तुतियों में इसका उपयोग किया गया। नई पीढ़ी तक इसकी पहुंच तब और बढ़ी जब इसे आधुनिक अंदाज में दोबारा प्रस्तुत किया गया। हालांकि मूल गीत की लोकप्रियता और उसकी सांस्कृतिक पहचान आज भी बरकरार है।
संगीत प्रेमियों के लिए यह गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय भाषाई विविधता और रचनात्मक लेखन का भी उदाहरण है। ‘मुंगड़ा’ शब्द के वास्तविक अर्थ को जानने के बाद यह गीत केवल एक लोकप्रिय डांस नंबर नहीं रह जाता, बल्कि लोक संस्कृति, भाषा और प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति के सुंदर मेल के रूप में सामने आता है। यही वजह है कि लगभग पांच दशक बाद भी यह गीत लोगों की स्मृतियों और संगीत की दुनिया में अपनी खास जगह बनाए हुए है।
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