
इंदौर। सालभर पहले सुप्रीम कोर्ट से इंदौर विकास प्राधिकरण को बड़ी सफलता मिली और योजना 97 पार्ट-2 और पार्ट-4 की लगभग 210 एकड़ जमीन उसके स्वामित्व की घोषित की गई। रिंग रोडकी इन दोनों महत्वपूर्ण योजनाओं की ये जमीनें आज डेढ़ हजार करोड़ रुपए से अधिक कीमत की है, जिसको छुड़वाने के लिए रसूखदारों ने तमाम प्रयास भी किए। अब पहले चरण में प्राधिकरण 97 पार्ट (2) की लगभग 40 एकड़ की जमीन को विकसित करने जा रहा है, क्योंकि शेष जमीन पहले से ही विकसित है। नगर तथा ग्राम निवेश ने पिछले दिनों इस जमीन का अभिन्यास मंजूर किया, उसके बाद अब लगभग 34 करोड़ रुपए के विकास कार्यों के टेंडर प्राधिकरण ने जारी कर दिए हैं।
रिंग रोड की इस योजना में बिजलपुर और तेजपुर गड़बड़ी की जमीनें शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट से प्राधिकरण को लगभग 210 एकड़ जमीन हासिल हुई, जो कि पार्ट-2 और पार्ट-4 में शामिल रही है। शासन स्तर पर इन जमीनों पर दी गई एनओसी की जांच भी शुरू करवाई। हालांकि एक मामले में हाईकोर्ट स्टे के चलते यह जांच रूकी हुई है। इसी में 42 एकड़ सिटी फॉरेस्ट की भी जमीन है। एबी रोड पर माँ विहार से लगी हुई बेशकीमती योजना 97 पार्ट-2 की अविकसित जमीन पर विकास कार्य शुरू कराए जाएंगे। सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े के निर्देश पर प्राधिकरण ने अभी इन विकास कार्यों के लिए लगभग 34 करोड़ रुपए की के टेंडर जारी जारी किए हैं। प्राधिकरण के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर कपिल देव भल्ला के मुताबिक इस जमीन पर अभिन्यास भी मंजूर हो चुका है और विकास कार्यों के बाद प्राधिकरण टेंडर के जरिए हासिल भूखंडों को विक्रय करेगा।
प्राधिकरण की प्लानिंग शाखा के मुताबिक, पूर्व में यहां पर जो अवैध निर्माण या कॉलोनी विकसित की जा रही थी उनमें छोटे-छोटे भूखंड काटे गए थे। मगर एबी रोड पर स्थित यह जमीन चूंकि अत्यंत बेशकीमती है, लिहाजा आगे की तरफ एक-एक लाख स्क्वेयर फीट के आरसीएम की तर्ज पर भूखंड रहेंगे, ताकि उन पर बड़ी बहुमंजिला आवासीय-व्यवसायिक बिल्डिंगें, होटल, शॉपिंग मॉल, हॉस्पिटल सहित अन्य तरह के रियल इस्टेट के बड़े प्रोजेक्ट आ सकें। वहीं पीछे की तरफ अवश्य छोटे भूखंड रहेंगे। प्राधिकरण इन सभी भूखंडों को टेंडर के जरिए बेचकर 500 करोड़ रुपए से अधिक की राशि हासिल कर सकेगा। अब पूर्व में प्राधिकरण बोर्ड योजना 97 पार्ट-2 और पार्ट-4 में किए जाने वाले विकास कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति भी हासिल कर चुका है, जिसमें योजना 97 पार्ट-2 में लगभग 118 करोड़ और योजना 97 पार्ट-4 में 200 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च की जाना है। यह भी उल्लेखनीय है कि रीजनल पार्क के सामने की जमीन भी इसी में शामिल है, जहां पर हर साल दीपावली के वक्त पटाखों का थोक मार्केट लगता है। कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट से प्राधिकरण को 210 एकड़ जमीन जो हासिल हुई वह उसके लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं है।
20 एकड़ जमीन बुरहानी गृह निर्माण संस्था की भी है शामिल
प्राधिकरण द्वारा 97 पार्ट-2 की जिन जमीनों पर अभी विकास कार्य किए जाना है उनमें चर्चित बुरहानी गृह निर्माण संस्था की लगभग 20 एकड़ जमीन भी शामिल है। एबी रोड स्थित माँ विहार कॉलोनी के पहले स्थित संस्था की इस जमीन को छुड़वाने के लिए भाजपा के ही कई बड़े नेता सक्रिय रहे और इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ तक भी पहुंची। अग्रिबाण ने इस मामले का भंडाफोड़ भी किया था और इस जमीन को छुड़वाने के तमाम प्रयास अंतत: धराशायी हो गए और अब प्राधिकरण अभिन्यास मंजूरी के बाद विकास कार्य कर बड़े भूखंड टेंडर के जरिए इसका अलावा साथ लगी जमीनों पर बेचेगा।
कल हाउसिंग बोर्ड में नामांतरण, लीज नवीनीकरण, फ्री होल्ड को लेकर शिविर भी
हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष ओम जैन के मुताबिक, कल इंदौर कार्यालय कार्यालय एबी रोड, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक नामांतरण, लीज नवीनीकरण, रजिस्ट्री और फ्री होल्ड संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए हितग्राही समस्या समाधान शिविर आयोजित किया गया है। इस दौरान वे खुद भी मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार हितग्राहियों को पारदर्शिता के साथ नियमों-प्रावधानों की जानकारी देते हुए उनके लम्बित प्रकरणों का निराकरण तो करवाया ही जाएगा, साथ ही हाउसिंग बोर्ड की विभिन्न उपलब्ध सम्पत्तियों की जानकारी भी देंगे।
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