
इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी सरकार विरोधी आंदोलन (Anti-government movement) के बीच आम लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों और विपक्षी नेताओं के दावों के अनुसार, क्षेत्र में भोजन, राशन, ईंधन और आवश्यक दवाओं की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिससे कई इलाकों में मानवीय संकट (Humanitarian crisis) जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
रिपोर्टों के मुताबिक मुजफ्फराबाद, पुंछ, रावलाकोट, बाग और नीलम घाटी सहित कई क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की कमी महसूस की जा रही है। स्थानीय लोगों और ट्रक चालकों का आरोप है कि जरूरी सामान लेकर आने वाले वाहनों को विभिन्न चौकियों पर रोका जा रहा है। हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने किसी भी तरह की आधिकारिक नाकेबंदी से इनकार किया है, लेकिन कई मीडिया रिपोर्टों में क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होने की बात सामने आई है।
सीमा चौकियों पर रोके जा रहे सामान से लदे वाहन
स्थानीय मीडिया के अनुसार, जब लोगों ने पड़ोसी क्षेत्रों से स्वयं राशन और दवाएं खरीदकर लाने की कोशिश की तो उन्हें भी कई स्थानों पर रोक दिया गया। आजाद पट्टन और फगवारी क्षेत्रों में व्यावसायिक ट्रकों और निजी वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की खबरें हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में वाहन लंबे समय से खड़े हैं और खराब होने वाली वस्तुओं को नुकसान पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों ने सुनाई परेशानी
एक रिपोर्ट के अनुसार नवीद नामक स्थानीय निवासी ने दावा किया कि रावलपिंडी से खरीदा गया राशन और दवाएं लेकर लौटते समय उसकी गाड़ी को रोक दिया गया। उनका कहना है कि परिवार में कठिन परिस्थितियां होने के बावजूद उन्हें सामान ले जाने की अनुमति नहीं मिली।
वहीं नीलम घाटी के निवासी अलिफ दीन ने बताया कि पिछले कई दिनों से सरकारी डिपो से आटा नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि लगातार प्रयासों के बावजूद राशन उपलब्ध नहीं हो रहा, जबकि खुले बाजार में कीमतें काफी बढ़ गई हैं।
दवाओं और ईंधन का भी संकट
मुजफ्फराबाद के 64 वर्षीय मोहम्मद मकीन ने बताया कि उन्हें इलाज के लिए जरूरी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक कई मेडिकल स्टोर और फार्मेसियां पिछले दो सप्ताह से बंद हैं। पुंछ और मुजफ्फराबाद के कई पेट्रोल पंपों पर भी आपूर्ति प्रभावित होने की बात कही जा रही है, जिससे लोगों को महंगे दामों पर ईंधन खरीदना पड़ रहा है।
सरकार पर लगे गंभीर आरोप
स्थानीय अखबारों और मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रावलाकोट में जारी धरने को समाप्त करने के लिए प्रदर्शनकारियों तक पहुंचने वाली रसद और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सीमित करने की रणनीति अपनाई गई है। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया है।
क्यों हो रहा है आंदोलन?
विवाद की मुख्य वजह PoK की विधानसभा में जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को लेकर उठे सवाल बताए जा रहे हैं। आंदोलनकारी समूहों का आरोप है कि इन सीटों का उपयोग स्थानीय राजनीति और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। इसी मुद्दे को लेकर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी है।
रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों में अब तक कम से कम 58 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इंटरनेट सेवाओं पर भी असर पड़ने की जानकारी सामने आई है।
आंदोलन में बढ़ रही भागीदारी
विरोध प्रदर्शनों के बावजूद आंदोलन लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। रावलाकोट के ईदगाह मैदान में चल रहे धरने में पिछले दो सप्ताह के दौरान 70 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है। JAAC नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक एक लाख लोगों की विशाल रैली निकाली जाएगी।
दूसरी ओर, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की PoK इकाई ने भी इस पूरे घटनाक्रम की आलोचना करते हुए सरकार पर लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित करने का आरोप लगाया है।
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