नई दिल्ली। बीते चार दिनों के भीतर दुनिया के कई देशों में आए लगातार शक्तिशाली भूकंपों (Powerful earthquakes) ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वेनेजुएला, जापान, अमेरिका, पाकिस्तान, अफगानिस्तान (Venezuela, Japan, USA, Pakistan, Afghanistan) और भारत में महसूस किए गए झटकों के बाद सोशल मीडिया पर वैश्विक तबाही और बड़े भूकंपों की आशंकाएं जताई जाने लगीं। हालांकि, भूकंप वैज्ञानिकों का कहना है कि इन घटनाओं के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। अलग-अलग टेक्टोनिक प्लेटों पर आए ये भूकंप महज समय का संयोग हैं, न कि किसी वैश्विक चेन-रिएक्शन का हिस्सा।
इस सिलसिले की सबसे भयावह घटना वेनेजुएला में सामने आई, जहां बुधवार को 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचाई। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक इस आपदा में अब तक 1,430 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 50 हजार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
बचाव एजेंसियों के अनुसार, मलबे में दबे लोगों को जीवित निकालने के लिए शुरुआती 72 घंटे सबसे अहम माने जाते हैं। यह समयसीमा गुजर जाने के बाद लापता लोगों के सुरक्षित मिलने की संभावना काफी कम हो जाती है।
वेनेजुएला के बाद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से भी भूकंप की खबरें आती रहीं।
लगातार अलग-अलग देशों में आए भूकंपों ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि क्या धरती किसी बड़े भूगर्भीय बदलाव के दौर से गुजर रही है। लेकिन वैज्ञानिक इस आशंका को खारिज करते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक पृथ्वी की सतह कई विशाल टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है। जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती, खिसकती या रगड़ खाती हैं, तब भूकंप आते हैं। हाल के सभी भूकंप अलग-अलग प्लेट सीमाओं पर आए हैं, इसलिए इन्हें एक-दूसरे से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में आए भूकंप इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच लगातार बनने वाले दबाव का परिणाम हैं। वहीं वेनेजुएला में भूकंप कैरेबियन प्लेट और दक्षिण अमेरिकी प्लेट के संपर्क क्षेत्र में आया।
चूंकि ये सभी क्षेत्र हजारों किलोमीटर की दूरी पर स्थित अलग-अलग टेक्टोनिक प्रणालियों का हिस्सा हैं, इसलिए इनके बीच किसी वैश्विक भूगर्भीय श्रृंखला का संबंध नहीं माना जा सकता।
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के असिस्टेंट कोऑर्डिनेटर विलियम बार्नहार्ट ने ब्रिटिश अखबार द गार्डियन से बातचीत में कहा कि दुनिया में हर दिन भूकंप आते हैं, लेकिन अधिकांश आबादी से दूर होने के कारण लोगों को उनका एहसास नहीं होता।
उनके अनुसार, बीता सप्ताह इसलिए असामान्य लगा क्योंकि कई बड़े भूकंप आबादी वाले क्षेत्रों में आए और लोगों ने उन्हें सीधे महसूस किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी एक बड़े भूकंप का हजारों किलोमीटर दूर दूसरे बड़े भूकंप से सीधा संबंध नहीं होता और इसे महज संयोग माना जाना चाहिए।
वहीं यूसीएलए के प्रोफेसर मार्टिन हडसन का भी कहना है कि इतनी कम अवधि में अलग-अलग महाद्वीपों पर बड़े भूकंप आना दुर्लभ जरूर है, लेकिन इसे किसी वैश्विक महाविनाश या बड़े भूगर्भीय संकट का संकेत नहीं माना जा सकता।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल की घटनाओं ने लोगों की चिंता जरूर बढ़ाई है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि दुनिया किसी बड़े वैश्विक भूकंप या महाविनाश की ओर बढ़ रही है। अलग-अलग क्षेत्रों में आए ये भूकंप अपनी-अपनी टेक्टोनिक गतिविधियों का परिणाम हैं और इनका एक-दूसरे से सीधा संबंध नहीं है।
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