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पानी घटा तो बरगी डैम हुआ बेपर्दा

July 01, 2026

  • प्राचीन मंदिर, पुरानी नाव के साथ दिखाई दिया कैनाल गेट

जबलपुर। मध्यप्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जलाशयों में शामिल बरगी बांध इन दिनों सिर्फ पानी की कमी से नहीं, बल्कि कई ऐसे सवालों से भी घिर गया है जिनका जवाब अब प्रशासन और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण को देना होगा। 42 वर्षों के इतिहास में पहली बार बरगी डैम का जलस्तर इतना नीचे पहुंच गया कि जो संरचनाएं हमेशा पानी में दबी रहती थीं, वे अब खुली आंखों से दिखाई देने लगी हैं।डैम के तल से निकला एक प्राचीन मंदिर, पुनर्वास विभाग की वर्षों पुरानी लावारिस नाव और सबसे चौंकाने वाली बात दक्षिणी तट का विशाल कैनाल गेट पूरी तरह पानी के ऊपर दिखाई देना। यह दृश्य केवल प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि जल प्रबंधन पर गंभीर सवाल भी खड़े कर रहा है।



  • 42 साल में पहली बार दिखा 100 फीट ऊंचा कैनाल गेट
    बरगी डैम का फुल टैंक लेवल 422.76 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 407.45 मीटर तक पहुंच चुका है। यानी डैम में अब मात्र करीब 5.5 मीटर उपयोगी पानी बचा है।सबसे बड़ी बात यह है कि जिस दायीं नहर का विशाल गेट वर्षों से पूरी तरह पानी में डूबा रहता था, वह अब पहली बार पूरी तरह बाहर दिखाई दे रहा है। लगभग 50 फीट चौड़ा और 100 फीट ऊंचा यह इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण माना जाता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि डैम बनने के बाद आज तक ऐसा दृश्य कभी देखने को नहीं मिला।

    मंदिर और पुरानी नाव ने बढ़ाई रहस्य की परतें
    पानी घटने के साथ डूब क्षेत्र में स्थित एक पुराना मंदिर भी फिर से सामने आ गया है, जो सामान्य वर्षों में पूरी तरह जलमग्न रहता था।इसी क्षेत्र में पुनर्वास विभाग की एक पुरानी नाव भी दिखाई दी है, जिसे वर्षों पहले छोड़ दिया गया था। सवाल यह है कि यदि पानी इतनी तेजी से नहीं घटता तो क्या ये संरचनाएं कभी सामने आतीं?

    हर दिन 5 सेंटीमीटर घट रहा पानी
    बरगी बांध के प्रभारी अधिकारियों के अनुसार जलस्तर प्रतिदिन लगभग 5 सेंटीमीटर घट रहा है।पानी कम होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, गर्मी में अत्यधिक वाष्पीकरण नर्मदा नदी में पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखना बिजली उत्पादन सिंचाई के लिए लगातार पानी छोड़ा जाना खरीफ सीजन की नहरों की मांगलेकिन सवाल यह है कि क्या इन सभी जरूरतों के बीच जल संरक्षण की कोई प्रभावी रणनीति बनाई गई थी?

    क्या केवल मौसम जिम्मेदार है?
    विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार मानसून आने से पहले डैम का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचना सामान्य घटना नहीं है।कुछ महत्वपूर्ण सवाल अब जांच की मांग कर रहे हैं क्या अनुमान से अधिक पानी छोड़ा गया? क्या सिंचाई प्रबंधन में संतुलन नहीं रखा गया? क्या जलवायु परिवर्तन ही अकेला कारण है? क्या भविष्य के लिए पर्याप्त जल भंडारण की योजना विफल रही? यदि मानसून कमजोर रहा तो क्या जबलपुर सहित निचले क्षेत्रों में जल संकट गहरा सकता है?

    किसानों और शहर की चिंता बढ़ी
    बरगी बांध केवल बिजली उत्पादन का स्रोत नहीं है, बल्कि हजारों किसानों की सिंचाई और कई क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था भी इसी पर निर्भर है। दायीं नहर से कटनी और आगे सतना तक पानी पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना भी इसी जलाशय पर आधारित है।ऐसे में यदि जलस्तर लगातार इसी तरह गिरता रहा तो आने वाले महीनों में सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन—तीनों प्रभावित हो सकते हैं।बरगी डैम का खाली होना सिर्फ एक प्राकृतिक घटना मानकर छोड़ देना भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आवश्यकता इस बात की है कि एक स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, जिसमें यह स्पष्ट हो, इस वर्ष कितना पानी आया और कितना छोड़ा गया।जल उपयोग का वास्तविक हिसाब क्या है। क्या संचालन नियमों का पालन हुआ। भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या सुधार आवश्यक हैं। 42 वर्षों में पहली बार सामने आया यह दृश्य सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की जल सुरक्षा, जल प्रबंधन और भविष्य की सिंचाई व्यवस्था पर बड़ा चेतावनी संकेत माना जा रहा है।

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