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ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम मिलने पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को क्यों घेरा?

July 10, 2026

नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम मिलने को ब्रेकथ्रू बताने के लिए बीजेपी को कांग्रेस ने आड़े हाथों लिया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर कहा कि, BJP का इकोसिस्टम यह दिखाने में लगा हुआ है कि ऑस्ट्रेलिया का भारत को यूरेनियम बेचना मोदी की कामयाबी है. जबकि, 4 दिसंबर 2011 को, ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड को अक्टूबर 2008 के भारत-US न्यूक्लियर एग्रीमेंट के बाद भारत को यूरेनियम बेचने के लिए अपनी पार्टी से मंजूरी मिल गई थी.

जयराम ने कहा कि, BJP के ट्रोल्स, जिनमें उसके कुछ MP भी शामिल हैं, इन सभी को अपना होमवर्क बेहतर तरीके से करने की जरूरत है. दरअसल, ऑस्ट्रेलिया ने 2011 में ही भारत को न्यूक्लियर एक्सपोर्ट पर लगा बैन हटा लिया था. कांग्रेस का सवाल है कि, मोदी सरकार को ये बताना चाहिए कि अगर भारत इतना ‘भरोसेमंद स्ट्रेटेजिक पार्टनर’ था, तो 5 सितंबर 2014 के न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट को लागू होने में 11 साल क्यों लगे?


  • जयराम ने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि, अवार्ड-जीवी ने गर्व से घोषणा की है कि, ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम सप्लाई करेगा. जबकि, ये सिर्फ यूनाइटेड स्टेट्स-इंडिया न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट की वजह से मुमकिन हो पाया है, जो आखिरकार 8 अक्टूबर, 2008 को कानून बन गया. जुलाई 2005 में प्रेसिडेंट जॉर्ज बुश के साथ डॉ. मनमोहन सिंह की मीटिंग ने ही बातचीत शुरू की थी. कांग्रेस ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि, उस दौरान BJP ने पार्लियामेंट के अंदर और बाहर, दोनों जगह इस बदलाव लाने वाले एग्रीमेंट का हमेशा से विरोध किया था. कांग्रेस टर्निंग पॉइंट बनाती है जबकि BJP यू-टर्निंग पॉइंट बनाने में माहिर है.

    भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 9 जुलाई को सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, समुद्री सुरक्षा और ज़रूरी मिनरल सेक्टर से जुड़े कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बानीज ने शांतिपूर्ण इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सुनिश्चित करने में दोनों देशों की साझेदारी की अहम भूमिका पर जोर दिया. सिविल न्यूक्लियर एनर्जी पर यह समझौता हुआ, जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की कमर्शियल सप्लाई की जाएगी ताकि नई दिल्ली के न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स को ईंधन मिल सके, दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक सिविल न्यूक्लियर सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर होने के 10 साल से ज्यादा समय बाद हुआ है.

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