
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने तमिलनाडु में गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के (To ban Cow Slaughter in Tamil Nadu) मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी (Stayed Madras High Court’s Decision) । हाईकोर्ट ने 1976 के सरकारी आदेश को लागू करके तमिलनाडु में गोहत्या पर राज्यव्यापी प्रतिबंध को तुरंत लागू करने का निर्देश दिया था।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सोमवार को मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि अंतरिम आदेश के जरिए फैसले पर रोक लगाने से पहले उसमें सुधार की जरूरत थी। कोर्ट ने आज इस मामले में नोटिस जारी किया और हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी और अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रशांतो सेन ने तमिलनाडु सरकार का पक्ष रखा। तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि राज्य में कहीं भी, बकरीद के जश्न के दौरान या किसी अन्य दिन, किसी गाय या बछड़े की हत्या न हो।
हाईकोर्ट का यह विवादित फैसला कोयंबटूर के रहने वाले के. सूर्या की जनहित याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने सार्वजनिक जगहों पर गायों के वध को रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की थी। हालांकि, तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि गाय के वध पर रोक का आदेश देते समय हाईकोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया।
अपनी याचिका में राज्य सरकार ने तर्क दिया कि यह आदेश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के खिलाफ है। इस कानून के अनुसार 10 साल से अधिक उम्र की ऐसी गायों का वध किया जा सकता है, जो काम करने या प्रजनन के लिए उपयुक्त नहीं हैं। इसके अलावा, दूसरे कानून भी पशुओं के वध को नियंत्रित करते हैं, लेकिन कहीं भी इन कानूनों में पूर्ण प्रतिबंध की बात नहीं कही गई है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करने और पशु वध को नियंत्रित करने वाले मौजूदा कानूनों के तहत कानूनी स्थिति को बहाल करने का आग्रह किया है।
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