
नई दिल्ली: भारत के विदेश व्यापार ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत रिकॉर्ड के साथ की है. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जून 2026 के बीच देश का कुल निर्यात यानी गुड्स और सर्विसेज मिलाकर 232.73 अरब डॉलर रहा. यह किसी भी वित्त वर्ष की पहली तिमाही का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. पिछले साल इसी अवधि में यह 208.98 अरब डॉलर था यानी 11.37 फीसदी की बढ़त लेकिन इसी दौरान चीन और रूस से आयात में बड़ी उछाल आई है और व्यापार घाटा भी बढ़ा है. इस बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत अब अमेरिका से एनर्जी खरीद बढ़ाने जा रहा है.
अमेरिका से एनर्जी खरीदेगा भारत
वाणिज्य सचिव ने आंकड़े जारी करते हुए कहा कि भारत अपनी एनर्जी बास्केट में विविधता लाने के लिए अमेरिका से एनर्जी इंपोर्ट बढ़ा रहा है. मतलब साफ है कच्चे तेल और गैस के लिए भारत अब गिने-चुने देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और सप्लाई की अनिश्चितता के बीच यह बयान काफी अहम है. अमेरिका के साथ द्विपक्षीय ट्रेड डील की बातचीत भी चल रही है ऐसे में एनर्जी खरीद बढ़ाना रिश्तों के लिहाज से भी बड़ा संकेत माना जा रहा है. आंकड़े भी यही इशारा कर रहे हैं. अमेरिका से आयात इस तिमाही में 13.45 अरब डॉलर से बढ़कर 16.65 अरब डॉलर पहुंच गया करीब 24 फीसदी ज्यादा.
जून में भी अच्छी रफ्तार
सिर्फ जून 2026 की बात करें तो कुल निर्यात 73.45 अरब डॉलर रहा जो पिछले साल जून के 67.09 अरब डॉलर से 9.48 फीसदी ज्यादा है. मर्चेंडाइज निर्यात 34.98 अरब डॉलर से बढ़कर 40.41 अरब डॉलर हो गया. सर्विसेज निर्यात 32.11 अरब डॉलर से बढ़कर 33.03 अरब डॉलर रहा. पूरी तिमाही में मर्चेंडाइज निर्यात 129.32 अरब डॉलर रहा पिछले साल से 15.92 फीसदी ज्यादा. सर्विसेज निर्यात 103.41 अरब डॉलर रहा जिसमें 6.16 फीसदी की बढ़त है ! हालांकि सर्विसेज का जून वाला आंकड़ा अभी अनुमान है क्योंकि RBI का डेटा मई तक का ही आया है.
आयात की रफ्तार निर्यात से तेज
अप्रैल-जून 2026 में कुल आयात 270.15 अरब डॉलर रहा जो पिछले साल से 17.55 फीसदी ज्यादा है. मर्चेंडाइज आयात करीब 20 फीसदी बढ़कर 216.18 अरब डॉलर पहुंच गया यानी आयात की रफ्तार निर्यात से तेज है और इसी वजह से पहली तिमाही में कुल व्यापार घाटा करीब 37.4 अरब डॉलर बैठता है जो पिछले साल से काफी ज्यादा है.
आयात बढ़ने की सबसे बड़ी वजह कच्चा तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स रहे. इनका आयात 49.24 अरब डॉलर से बढ़कर 60.62 अरब डॉलर हो गया. इलेक्ट्रॉनिक सामान का आयात 26.75 अरब डॉलर से बढ़कर 38.46 अरब डॉलर पहुंचा करीब 44 फीसदी की उछाल. सोने का आयात 7.49 अरब डॉलर से बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया यानी करीब 47 फीसदी ज्यादा.
चीन से रिकॉर्ड आयात – अकेले चीन से घाटा 32 अरब डॉलर के पार
आयात के मामले में चीन सबसे ऊपर है. चीन से आयात 29.73 अरब डॉलर से बढ़कर 38.04 अरब डॉलर पहुंच गया. जबकि भारत ने चीन को सिर्फ 5.60 अरब डॉलर का सामान बेचा यानी अकेले चीन के साथ तिमाही में करीब 32.4 अरब डॉलर का घाटा है जो भारत के कुल व्यापार घाटे के लगभग बराबर है.
रूस दूसरे नंबर पर है. रूस से आयात 16.77 अरब डॉलर से बढ़कर 25.60 अरब डॉलर हो गया करीब 53 फीसदी की उछाल. इसमें बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का है. रूस अब आयात के मामले में अमेरिका से आगे निकल चुका है. दिलचस्प बात यह है कि टॉप 10 में UAE अकेला देश है जहां से आयात घटा है 16.79 अरब डॉलर से गिरकर 15.03 अरब डॉलर.
निर्यात में अमेरिका सबसे बड़ा बाजार
निर्यात के मामले में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है. अप्रैल-जून 2026 में भारत ने अमेरिका को 25.47 अरब डॉलर का सामान बेचा. इसके बाद यूएई को 7.95 अरब डॉलर और सिंगापुर को 6.52 अरब डॉलर का निर्यात हुआ. छोटे बाजारों की ग्रोथ चौंकाने वाली है. श्रीलंका को निर्यात 124.6 फीसदी बढ़कर 2.35 अरब डॉलर हो गया. सिंगापुर को निर्यात दोगुना से ज्यादा यानी 101.2 फीसदी बढ़ा. ऑस्ट्रेलिया को 25.1 फीसदी, मेक्सिको को 21.5 फीसदी, जर्मनी को 12.2 फीसदी और ब्रिटेन को 11.1 फीसदी की बढ़त मिली. तंजानिया को निर्यात 1.18 अरब डॉलर से बढ़कर 2.91 अरब डॉलर हो गया करीब ढाई गुना.
FTA के मोर्चे पर भी तेजी
भारत और ओमान के बीच CEPA समझौता 1 जून 2026 से लागू हो चुका है. भारत और ब्रिटेन का ट्रेड एग्रीमेंट CETA 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है यानी ब्रिटेन को निर्यात में आगे और तेजी की उम्मीद है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर 22 से 24 जून के बीच ट्रेड डील की बातचीत के लिए दिल्ली आए थे. भारत और कनाडा के बीच CEPA पर तीसरे दौर की बातचीत जुलाई की शुरुआत में ओटावा में हुई. इसके अलावा भारत ने 6 से 10 जुलाई तक दिल्ली में ASEAN के साथ AITIGA रिव्यू की 13वीं joint committee meeting होस्ट की.
आगे क्या देखना होगा
पहली तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि निर्यात के मोर्चे पर भारत की शुरुआत रिकॉर्ड तोड़ रही है लेकिन तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने का बढ़ता आयात व्यापार घाटे को ऊपर धकेल रहा है. अब नजर इस पर रहेगी कि अमेरिका से एनर्जी खरीद कितनी तेजी से बढ़ती है और 15 जुलाई से लागू हो रहा ब्रिटेन वाला ट्रेड एग्रीमेंट अगली तिमाही के आंकड़ों में कितना असर दिखाता है.
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