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पेंशन लेने पहुंचे बुजुर्ग और दिव्यांग बेटे के अकाउंट में आए 15 अरब रुपये, फिर जो हुआ…

July 13, 2026

मुजफ्फरपुर। कहते हैं कि जब ऊपरवाला देता है तो छप्पर फाड़कर देता है, लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक ऐसा वाकया सामने आया जिसने पल भर के लिए एक गरीब परिवार को अरबपति बना दिया और अगले ही पल सबकुछ जीरो हो गया। मामला मुजफ्फरपुर के सकरा प्रखंड के थतिया सीहो गांव का है, जहां वृद्धावस्था पेंशन निकालने पहुंचे एक बुजुर्ग और उनके दिव्यांग बेटे के बैंक खातों में अचानक कुल मिलाकर करीब 15 अरब (1500 करोड़) रुपये का बैलेंस दिखाई देने लगा। हालांकि, कुदरत और तकनीकी गड़बड़ी का ऐसा खेल चला कि महज 10 मिनट के भीतर यह पूरी राशि गायब हो गई।

जानकारी के अनुसार, थतिया सीहो गांव के निवासी 82 वर्षीय कामेश्वर मिश्र उर्फ ‘घुमक्कड़’ अपने दिव्यांग बेटे के साथ गांव के ही एक ग्राहक सेवा केंद्र पर अपनी पेंशन राशि निकालने गए थे। कामेश्वर मिश्र ने वृद्धावस्था पेंशन के 1100 रुपये और उनके बेटे ने अपनी दिव्यांग पेंशन की राशि निकाली। इसके बाद जब दोनों ने अपने खातों का बैलेंस चेक कराया, तो कंप्यूटर स्क्रीन पर जो दिखा उसे देखकर न सिर्फ दोनों पिता-पुत्र, बल्कि सीएससी संचालक की आंखें भी फटी की फटी रह गईं।


  • दोनों के खातों में अलग-अलग करीब 7,59,69,51,951 रुपये (लगभग 7.59 अरब रुपये) बैलेंस शो हो रहा था। दोनों अकाउंट की कुल राशि मिलाकर लगभग 15 अरब रुपये थी। केंद्र पर मौजूद लोग हैरान-परेशान होकर करीब 4 से 5 मिनट तक तो सिर्फ स्क्रीन पर दिख रहे अंकों को गिनते रहे और इकाई-दहाई का हिसाब लगाते रहे। जब यह तसल्ली हो गई कि राशि वाकई अरबों में है, तो वहां मौजूद हर शख्स की धड़कनें तेज हो गईं।

    अचानक खाते में महासागर जैसी बड़ी रकम देखकर सीएसपी संचालक ने तुरंत उसमें से कुछ हिस्सा निकालने का प्रयास किया। लेकिन “किस्मत में जो नहीं, वो मिल नहीं सकता” की तर्ज पर, हर बार तकनीकी कारणों से ट्रांजेक्शन फेल होता रहा। खाते में अरबों रुपये देखकर बुजुर्ग कामेश्वर मिश्र को लगा था कि शायद उनके जीवन की सारी आर्थिक परेशानियां हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी। लेकिन यह खुशी चंद मिनटों की ही मेहमान थी।

    सीएसपी संचालक ने जब लगभग 10 मिनट बाद दोबारा खाते का बैलेंस चेक किया, तो स्क्रीन पर दिख रही अरबों की राशि पूरी तरह गायब हो चुकी थी और बैलेंस घटकर शून्य दिखाई देने लगा। पल भर में आए सुनहरे सपने ताश के पत्तों की तरह ढह गए और बुजुर्ग कामेश्वर मिश्र मायूस होकर वहीं सिर पकड़कर बैठ गए। इस अजीबोगरीब वाकये के बाद अब पूरे इलाके में बुजुर्ग कामेश्वर मिश्र को लोग मजाक में “10 मिनट का अरबपति” कहकर बुला रहे हैं। अजीबोगरीब वाकया पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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