
नई दिल्ली ।बॉलीवुड के प्रतिभाशाली अभिनेता संजय मिश्रा (Sanjay Mishra) आज अपनी सहज अभिनय शैली और दमदार किरदारों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनकी जिंदगी का एक दौर ऐसा भी था जब व्यक्तिगत दुख और स्वास्थ्य (Health) संबंधी चुनौतियों ने उन्हें पूरी तरह झकझोर दिया था। एक पुराने साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि गंभीर बीमारी से उबरने के तुरंत बाद पिता (Father) के निधन ने उन्हें मानसिक रूप से इतना प्रभावित किया कि उन्होंने अभिनय (Acting) से कुछ समय के लिए दूरी बना ली और शांति की तलाश में मुंबई छोड़कर ऋषिकेश (Rishikesh) चले गए।
संजय मिश्रा ने बताया था कि एक समय उनकी तबीयत बेहद खराब हो गई थी। इलाज के दौरान उनकी बड़ी सर्जरी हुई और लंबे समय तक उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि जैसे-तैसे वह स्वस्थ होने लगे थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। इस दोहरे आघात ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया और उन्हें महसूस होने लगा कि उन्हें कुछ समय के लिए भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर रहने की जरूरत है।
इसी मानसिक स्थिति में वह ऋषिकेश पहुंचे, जहां उन्होंने सामान्य जीवन जीने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि गंगा किनारे स्थित एक ढाबे पर उन्होंने काम करना शुरू किया। वहां वह ऑमलेट बनाने के साथ-साथ बर्तन साफ करने जैसे साधारण काम भी करते थे। इसके बदले उन्हें प्रतिदिन लगभग 150 रुपये मेहनताना मिलता था। उनके अनुसार, उस समय पैसों से अधिक महत्वपूर्ण मानसिक सुकून और आत्मिक शांति थी, जिसकी तलाश उन्हें वहां ले गई थी।
अभिनेता ने यह भी याद किया कि बीमारी के दौरान डॉक्टरों ने उनके परिवार को उनकी गंभीर स्थिति के बारे में बताया था। कठिन ऑपरेशन के बाद वह धीरे-धीरे ठीक हो रहे थे, लेकिन अस्पताल से छुट्टी मिलने के तुरंत बाद पिता के निधन की खबर ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया। उन्होंने अपने पिता के साथ हुई अंतिम बातचीत का भी जिक्र किया और स्वीकार किया कि उस समय कही गई कुछ बातें आज भी उन्हें याद आती हैं। यह अनुभव उनके जीवन का सबसे भावनात्मक और कठिन दौर साबित हुआ।
संजय मिश्रा का कहना था कि मानसिक तनाव से बाहर निकलने के लिए वह समय-समय पर आध्यात्मिक स्थानों की ओर चले जाते हैं। उनका मानना है कि कुछ समय तक स्वयं के साथ रहना और भीड़-भाड़ से दूर रहकर जीवन को समझना उन्हें मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। उन्होंने बताया कि ऐसे समय में वह कई बार फोन से भी दूरी बना लेते हैं ताकि पूरी तरह अपने विचारों पर ध्यान दे सकें।
आज संजय मिश्रा हिंदी सिनेमा के सबसे भरोसेमंद अभिनेताओं में गिने जाते हैं। फिल्मों और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उनके अभिनय को लगातार सराहा जाता है। गोलमाल, धमाल, भूल भुलैया, वध और कई अन्य फिल्मों में निभाए गए उनके किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे हैं। संघर्ष, बीमारी और निजी दुखों से गुजरने के बावजूद उन्होंने अपने अभिनय के दम पर अलग पहचान बनाई। उनकी जीवन यात्रा इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि कठिन परिस्थितियों के बाद भी धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास के सहारे नई शुरुआत की जा सकती है।
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