
नई दिल्ली। भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना के लिए सबसे पवित्र माने जाने वाले श्रावण मास (Sawan Month) में इस वर्ष दो ग्रहण पड़ने वाले हैं। पंचांग के अनुसार सावन 2026 में एक सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) और एक चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) का योग बन रहा है। ऐसे में कई श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन ग्रहणों के कारण पूजा-पाठ, अभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं।
कब लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण?
पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को होगा। यह खग्रास सूर्य ग्रहण रहेगा, जो आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और पुर्तगाल समेत कुछ देशों में दिखाई देगा। वहीं, 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन वर्ष का अंतिम आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कई क्षेत्रों में दिखाई देगा।
क्या भारत में सूतक काल प्रभावी रहेगा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल तभी मान्य माना जाता है, जब ग्रहण संबंधित क्षेत्र में दिखाई दे। चूंकि दोनों ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होंगे, इसलिए देश में इनका सूतक काल लागू नहीं होगा। ऐसे में श्रद्धालुओं को अपनी नियमित पूजा, व्रत, अभिषेक या अन्य धार्मिक कार्यों में किसी प्रकार का बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है।
पूजा-अर्चना पर नहीं पड़ेगा असर
ग्रहण भारत में दिखाई न देने के कारण मंदिरों के कपाट बंद करने या पूजा-पाठ पर रोक लगाने जैसी परंपराएं लागू नहीं होंगी। श्रद्धालु सावन के सोमवार सहित पूरे महीने भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और मंत्र जाप पहले की तरह कर सकेंगे।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
धार्मिक परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सावन के दौरान कुछ बातों का पालन शुभ माना जाता है-
– मन में नकारात्मक विचारों को स्थान न दें और सकारात्मक भाव बनाए रखें।
– भगवान शिव की पूजा पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ करें तथा मंत्र जाप जारी रखें।
– ग्रहण को लेकर फैलने वाली अफवाहों या भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करें, क्योंकि भारत में इन ग्रहणों का सूतक मान्य नहीं है।
– सावन के पवित्र महीने में दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है। अपनी श्रद्धा के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करना शुभ फलदायी माना जाता है।
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