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उच्च ग्रह बनाएंगे राजा या नीच ग्रह करेंगे परेशान जानिए कुंडली का असली गणित और ज्योतिष का बड़ा सच

July 19, 2026

नई दिल्ली । जन्मकुंडली(birth chart) में किसी ग्रह(planet)का उच्च या नीच होना हमेशा से लोगों के लिए आकर्षण(fascination) और जिज्ञासा( curiosity) का विषय रहा है। अक्सर यह धारणा बना ली जाती है कि यदि कुंडली में कई उच्च ग्रह मौजूद हैं तो व्यक्ति निश्चित रूप से अत्यंत सफल और भाग्यशाली होगा जबकि नीच ग्रह जीवन में केवल कठिनाइयां और असफलताएं ही लेकर आते हैं। लेकिन ज्योतिष शास्त्र इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानता। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी ग्रह का प्रभाव केवल उसकी राशि से नहीं बल्कि उसकी संपूर्ण स्थिति और कुंडली में उसके योगदान से तय होता है।

ज्योतिषविदों का कहना है कि किसी ग्रह का शुभ या अशुभ परिणाम उसके उच्च या नीच होने से कहीं अधिक इस बात पर निर्भर करता है कि वह कुंडली में किस भाव का स्वामी है और किस भाव में स्थित है। यदि कोई उच्च ग्रह ऐसे भाव का स्वामी है जो रोग ऋण शत्रु बाधा या संघर्ष से जुड़ा हुआ है तो वह अपनी शक्ति के साथ उन भावों के प्रभाव को भी बढ़ा सकता है। ऐसे में ग्रह शक्तिशाली होने के बावजूद व्यक्ति को अपेक्षित शुभ परिणाम नहीं मिलते।

दूसरी ओर यदि कोई ग्रह नीच राशि में स्थित है तो इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं कि वह हमेशा नकारात्मक परिणाम ही देगा। यदि वह ग्रह शुभ भाव का स्वामी हो शुभ ग्रहों की दृष्टि प्राप्त कर रहा हो मजबूत नवांश में स्थित हो या नीचभंग राजयोग जैसी स्थिति बना रहा हो तो वही ग्रह व्यक्ति को सम्मान धन सफलता और प्रतिष्ठा भी दिला सकता है। यही कारण है कि केवल ग्रह की राशि देखकर भविष्य का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जाता।


  • ज्योतिष शास्त्र में ग्रह जिस भाव में स्थित होता है उसका महत्व भी अत्यंत अधिक होता है। यदि उच्च ग्रह अशुभ भाव में बैठा हो या राहु केतु अथवा शनि जैसे ग्रहों से पीड़ित हो तो उसकी सकारात्मक शक्ति प्रभावित हो सकती है। वहीं नीच ग्रह यदि केंद्र या त्रिकोण में शुभ योग बना रहा हो और उस पर बृहस्पति चंद्रमा या शुक्र जैसे शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो वह आश्चर्यजनक रूप से लाभकारी परिणाम दे सकता है।

    फलादेश में ग्रहों की युति और दृष्टि भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई बार एक ग्रह दूसरे ग्रह के प्रभाव से अपना स्वभाव बदल देता है। यही कारण है कि केवल एक ग्रह को देखकर भविष्यवाणी करना ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जाता। किसी भी व्यक्ति के जीवन का सही आकलन करने के लिए पूरी कुंडली का संतुलित और गहन अध्ययन आवश्यक होता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार कई बार सामान्य दिखाई देने वाला ग्रह अपनी महादशा या अंतरदशा में असाधारण सफलता देता है जबकि अत्यंत मजबूत दिखाई देने वाला ग्रह अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाता। इसलिए किसी की कुंडली में उच्च ग्रह होने पर अत्यधिक उत्साहित होने या नीच ग्रह देखकर भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। सही फलादेश के लिए ग्रह की राशि भाव भावेश युति दृष्टि योग दशा और संपूर्ण कुंडली का समग्र विश्लेषण जरूरी होता है। ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं बल्कि व्यक्ति को सही दिशा और संतुलित मार्गदर्शन देना है।

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