
नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-America War) में सऊदी अरब (Saudi Arabia) के कूदने और इसकी आग इराक तक फैलने की वजह से कच्चा तेल (Crude oil) उबलने लगा है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल की ओर कदम बढ़ा दिया है। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल के सस्ता होने की उम्मीदों को झटका लगा है। साथ ही कच्चे तेल के महंगा होने का असर शैंपू से लेकर सड़क बनाने तक पर पड़ता है। एक अनुमान के मुताबिक एक बैरल कच्चे तेल में 10 डॉलर की बढ़ोतरी की वजह से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के ईरान पर नए हमलों की धमकी और अमेरिकी तेल भंडार में आई गिरावट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर आग लग गई है। खासकर ब्रेंट क्रूड के भाव में। बुधवार को ब्रेंट क्रूड 7.91 प्रतिशत की तेज उछाल के साथ 90.74 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। दूसरी ओर अब वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 84.43 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर स्थिर है।
ट्रंप का ईरान को चेतावनी भरा संदेश
राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में साफ किया कि जॉर्डन में अमेरिकी सेना पर हुए हमले के बाद ईरान को करारा जवाब दिया जाएगा। अमेरिका, ईरान और यूरोप के कई वरिष्ठ अधिकारियों और पूर्व अधिकारियों के अनुसार, यह संघर्ष अब महीनों तक खिंच सकता है। दोनों पक्ष होर्मुज स्ट्रेट को लेकर गतिरोध तोड़ने और युद्धविराम पर सहमति बनाने में नाकाम रहे हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिकी तेल भंडार में रिकॉर्ड गिरावट
अमेरिका में कमर्शियल क्रूड ऑयल के रिजर्व में मिड-जून के बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यह मध्य पूर्व में महीनों से जारी संघर्ष के बाद फिजिकल मार्केट में सख्ती बढ़ने के संकेत को और मजबूत करता है। वहीं, अमेरिका के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) में लगातार 18वें सप्ताह गिरावट आई है और यह 1983 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
बढ़ता संघर्ष और नए मोर्चे
ऊर्जा बाजार इस महीने नई अस्थिरता से गुजर रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की उम्मीद के बाद एक बार फिर लड़ाई तेज हो गई है। संघर्ष अब और फैल रहा है। ईरान समर्थित यमनी हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की नाकाबंदी की धमकी दी है, वहीं रियाद की सेना ने अमेरिका के साथ मिलकर इराक में तेहरान समर्थित मिलिशिया से जुड़े ठिकानों पर हमले किए हैं।
अब होर्मुज अमेरिका-ईरान विवाद के केंद्र में
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने बताया कि पिछले सप्ताह फारस की खाड़ी से करीब 13 मिलियन बैरल तेल प्रतिदिन निकला, जिसमें से आधा होर्मुज से और बाकी वैकल्पिक पाइपलाइनों के जरिए भेजा गया।
होर्मुज अमेरिका-ईरान विवाद के केंद्र में है। ईरान इस पर अपना नियंत्रण जताता है और अपनी अधिकारिता को चुनौती देने वाले टैंकरों पर हमला करता है। इस रास्ते से बचने के लिए सऊदी अरब ने अपनी कुछ सप्लाई ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए लाल सागर की ओर मोड़ दी है, लेकिन अब इस रास्ते को भी हूती विद्रोहियों से चुनौती मिल रही है।
ड्रोन हमलों में प्राकृतिक गैस के दो पोत में आग लगी
मिस्र के एक बंदरगाह पर ड्रोन हमलों के बाद प्राकृतिक गैस ले जा रहे दो पोत में आग लग गई। एक समुद्री सुरक्षा कंपनी ने यह जानकारी दी। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में कई मोर्चों पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है।
ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा फर्म एम्ब्रे के मुताबिक, हमले में अमेरिका के स्वामित्व वाले एक भंडारण सुविधा पोत और ग्रीस के मालिकाना हक वाले टैंकर को निशाना बनाया गया। मिस्र के पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, आग लगने की घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। मंत्रालय ने आग लगने के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन ड्रोन हमलों के लिए कौन जिम्मेदार है।
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