
नई दिल्ली: पाकिस्तान लगातार भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के फैसले पर सवाल उठा रहा है. हाल ही में पाक के पूर्व विदेश मंत्री ने इस्लामाबाद में धमकी दी थी कि अगर सिंधु नदी पर पाकिस्तान की मांगें पूरी नहीं हुईं तो भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया जाएगा. वहीं अब भारत ने इसको लेकर पाकिस्तान पर पलटवार किया है.
पानी, आतंक और पाकिस्तान अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने एक लेख के जरिए पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है. क्वात्रा ने कहा कि सिंधु जल संधि को भारत ने यूं ही स्थगित नहीं किया, बल्कि पाकिस्तान ने दशकों तक आतंकवाद, युद्ध और समझौते के दुरुपयोग से खुद इसकी बुनियाद कमजोर की.
विनय क्वात्रा ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर पाकिस्तान के आरोपों का विस्तार से जवाब दिया है. अपने लेख में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत पर ‘वॉटर एग्रेसर’ होने का आरोप लगाता है, जबकि उसकी जल समस्या की सबसे बड़ी वजह उसकी अपनी नीतियां और कुप्रबंधन हैं.
क्वात्रा ने लिखा कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की हत्या हुई थी, उसके एक दिन बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित (abeyance) करने का फैसला लिया. उन्होंने कहा कि यह हमला पाकिस्तान और पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने किया था.
लेख में याद दिलाया गया है कि 1960 की सिंधु जल संधि के तहत सिंधु बेसिन की छह प्रमुख नदियों में से तीन पूर्वी नदियों का नियंत्रण भारत को और तीन पश्चिमी नदियों का नियंत्रण पाकिस्तान को मिला था. इसके बावजूद भारत ने दशकों तक संधि का पालन किया.
क्वात्रा ने आरोप लगाया कि संधि का सम्मान करने के बावजूद पाकिस्तान ने 1965, 1971 और 1999 में भारत के खिलाफ युद्ध छेड़े, संसद हमले, मुंबई 26/11, पठानकोट, उरी, पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकी हमलों को समर्थन दिया. उनके अनुसार पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद में भारत के 40,000 से अधिक नागरिक मारे गए हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की जलविद्युत परियोजनाओं को पाकिस्तान ने लगातार कानूनी और नौकरशाही प्रक्रियाओं में उलझाए रखा. इतना ही नहीं, भारत के अनुसार कई परियोजनाओं पर आतंकी हमलों ने भी भारत को संधि के तहत अपने अधिकारों का पूरा उपयोग करने से रोका.
राजदूत ने कहा कि सिंधु जल संधि की प्रस्तावना ‘सद्भावना और मित्रता’ की भावना पर आधारित थी, लेकिन पाकिस्तान ने लगातार अपने व्यवहार से उसी भावना को खत्म कर दिया. ऐसे में संधि को स्थगित करने का फैसला केवल उस वास्तविकता को स्वीकार करना है जिसे पाकिस्तान की नीतियों ने पैदा किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का उल्लेख करते हुए क्वात्रा ने लिखा कि ‘आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते, और पानी और खून भी साथ-साथ नहीं बह सकते’.
लेख में पाकिस्तान की जल समस्या पर भी सवाल उठाए गए हैं. क्वात्रा के अनुसार पाकिस्तान को मिलने वाले पानी का केवल करीब 40 प्रतिशत ही खेतों तक पहुंचता है, जबकि 30 प्रतिशत से अधिक पानी रास्ते में ही बर्बाद हो जाता है और शेष समुद्र में चला जाता है.
विनय क्वात्रा ने लेख के अंत में उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान वास्तव में भारत के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर सहयोग चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपनी धरती पर मौजूद आतंकी ढांचे को खत्म करना होगा, न कि अपनी घरेलू विफलताओं के लिए हर बार भारत को जिम्मेदार ठहराना चाहिए.
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