
नई दिल्ली: पाकिस्तान (Pakistan) में एक बार फिर बड़े राजनीतिक तख्तापलट (Political coup) और सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज हो गई है. गृह मंत्री और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख मोहसिन नकवी के देश के शासन तंत्र को पूरी तरह विफल बताने और इतिहास के सबसे बड़े घोटाले का दावा करने के बाद इस्लामाबाद में हड़कंप मच गया है.
नकवी ने जजों, राजनेताओं और नौकरशाहों पर 21 साल से रिश्वत लेने का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है. सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के वरदहस्त से नकवी द्वारा शहबाज शरीफ सरकार को सीधी चुनौती दी जा रही है. पाकिस्तान इकोनॉमिक समिट में गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने खुले तौर पर कहा कि देश का दशकों पुराना प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है. इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि पाकिस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है. उन्होंने कहा कि पिछले 21 सालों से जजों, नौकरशाहों, राजनेताओं और बैंकरों को रिश्वत दी जा रही थी. नकवी ने कसम खाई कि इस मामले में शामिल हर एक व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
नकवी का पावर प्ले
पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति पर जियोपॉलिटिकल और रक्षा विश्लेषक संदीप उन्नीथन ने इंडिया टुडे/आजतक को बताया कि मोहसिन नकवी ने मीडिया प्रमुख से एक शाक्तिशाली राजनेता बनने का सफर तेज से तय किया है. वह लंबे वक्त से प्रधानमंत्री बनने की महत्वकांक्षा रखते हैं. मोहसिन नकवी के इन बयानों के पीछे सीधे सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का हाथ है. नकवी को जनरल मुनीर का बेहद करीबी और रिश्तेदार माना जाता है. विश्लेषकों का मानना है कि यही करीबी रिश्ता उन कारणों में से एक था, जिसकी वजह से मुनीर ने संघर्ष के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के लिए भी मुनीर ने शहबाज सरकार को दरकिनार कर नकवी को ही अपना विशेष प्रतिनिधि बनाया था.
शहबाज को साइड करने की तैयारी
बलूचिस्तान और पीओके (PoK) में बढ़ते जनाक्रोश और नागरिक असंतोष के बीच जनरल आसिम मुनीर अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहते हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि मुनीर अपने मोहरे मोहसिन नकवी के जरिए देश में नए प्रांत या प्रशासनिक इकाइयां बनाने का माहौल तैयार कर रहे हैं. इसका अंतिम मकसद मुनीर के लिए परवेज मुशर्रफ की तर्ज पर राष्ट्रपति और रक्षा बलों के प्रमुख के रूप में पूरी सत्ता हथियाने का रास्ता साफ करना है.
PML-N और PPP की चुप्पी
नकवी ने देश में जवाबदेही और न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नए प्रशासनिक प्रांत बनाने की वकालत की है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने भी सुरक्षा और सुशासन के दृष्टिकोण से इस प्रशासनिक पुनर्गठन का समर्थन किया है. हालांकि, सत्तारूढ़ पीएमएल-एन (PML-N) और PPP इस मुद्दे पर चुप हैं. इसका मुख्य कारण ये है कि दोनों पार्टियों की राजनीतिक ताकत पंजाब और सिंध प्रांतों से आती है. प्रांतीय सीमाओं में बदलाव से उनका राजनीतिक प्रभाव खत्म हो सकता है.
रक्षा मंत्री का पलटवार
मोहसिन नकवी की लगातार बयानबाजी से बौखलाए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने उन पर तीखा हमला बोला है. आसिफ ने कहा कि नकवी पिछले तीन सालों से बेहद शक्तिशाली पद पर हैं और वह प्रधानमंत्री तक को जवाबदेह नहीं हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर इतना ताकतवर व्यक्ति भी शिकायत कर रहा है तो बाकी मंत्रियों को घर चले जाना चाहिए. आसिफ ने कैबिनेट और संसदीय सत्रों में नकवी की सीमित भागीदारी की भी आलोचना की. उन्होंने दावा किया कि नकवी कैबिनेट की सिर्फ़ दो या तीन बैठकों में ही शामिल हुए. आसिफ ने कहा कि संसद में भी नकवी की मौजूदगी बहुत कम रही है.
आसिफ ने नकवी को सलाह दी कि वो सिस्टम बदलने की शुरुआत अपने मंत्रालय और पीसीबी (PCB) से करें, क्योंकि क्रिकेट फैंस उनके काम से खुश नहीं हैं. विश्लेषक और अन्य जानकारों के अनुसार, रावलपिंडी और इस्लामाबाद में उच्चस्तरीय बैठकों का दौर जारी है. जिस तरह से सिविलियन मशीनरी और न्यायपालिका को घेरा जा रहा है, उससे शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है. पाकिस्तान में सेना हमेशा से वास्तविक शासक रही है और अब वह एक बार फिर सीधे या अपने समर्थित मोहरों के जरिए पूरी सत्ता अपने हाथ में लेने की ओर बढ़ रही है.
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