
सोनी राजदान इन दिनों फिल्म ओम का हरी को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में उन्होंने एक मां की भूमिका निभाई है जो पति और बेटे के बीच चल रहे मतभेद को सुलझाने की कोशिश करती दिखाई देती हैं। सोनी का कहना है कि फिल्म में उनका किरदार वास्तविक जीवन में उनके व्यक्तित्व से काफी अलग है। हालांकि परिवार में मां की भूमिका को लेकर उन्होंने जो बातें कहीं उससे उन्हें अपने वास्तविक जीवन के कई अनुभव भी याद आए।
सोनी के मुताबिक किसी भी परिवार में मां अक्सर ऐसी भूमिका निभाती है जिसमें उसे अलग अलग लोगों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। कभी वह बातचीत सुलझाने वाली बनती है तो कभी परिवार के सदस्यों की परेशानियां सुनती है। जरूरत पड़ने पर वही सलाह देने वाली और समझाने वाली भी बन जाती है। सोनी ने कहा कि मां परिवार में कई भूमिकाएं निभाती है और कई बार उसे खुद पता भी नहीं चलता कि वह कब किस भूमिका में आ गई।
उन्होंने फिल्म की कहानी से जुड़े पिता और बेटे के रिश्ते पर भी बात की। सोनी ने कहा कि पिता और बेटे के बीच मतभेद होना कोई असामान्य बात नहीं है। कई परिवारों में पीढ़ियों के बीच सोच का अंतर दिखाई देता है। हालांकि उनका मानना है कि आज की नई पीढ़ी ऐसे रिश्तों और पारिवारिक परिस्थितियों को पहले की तुलना में अलग तरीके से समझने लगी है।
इसी बातचीत के दौरान सोनी ने अपने परिवार का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि कई बार महेश भट्ट उनसे कहते हैं कि बेटी को फोन कर दो। इस पर सोनी का जवाब होता है कि अगर बात करनी है तो वह खुद फोन कर सकते हैं क्योंकि उनके पास भी फोन है। सोनी ने मजाकिया अंदाज में बताया कि बेटियों के साथ उनकी अपनी अलग तरह की बातचीत और नोकझोंक होती है। ऐसे में वह महेश की ओर से बेटियों से बात करने की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं होतीं।
सोनी ने इसी संदर्भ में कहा कि उनके पति तीनों बेटियों से डरते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह डर किसी गंभीर अर्थ में नहीं है बल्कि एक प्यारे और मजेदार पारिवारिक रिश्ते का हिस्सा है। उनके मुताबिक पिता अक्सर बेटियों को लेकर ज्यादा सावधान रहते हैं जबकि बेटों के साथ उनका व्यवहार कुछ अलग हो सकता है। महेश भट्ट के मामले में भी उन्हें यही चीज दिखाई देती है क्योंकि उनकी तीन बेटियां हैं और वह तीनों के सामने एक अलग तरह की झिझक दिखाते हैं।
सोनी राजदान की यह बात परिवार में पिता और बेटियों के रिश्ते की एक हल्की फुल्की तस्वीर सामने लाती है। वहीं उनके फिल्मी काम की बात करें तो ओम का हरी में वह एक ऐसे किरदार में नजर आ रही हैं जो परिवार के भीतर पैदा हुए मतभेदों को संभालने की कोशिश करता है। उनकी बातचीत से यह भी पता चलता है कि पर्दे पर निभाए गए पारिवारिक किरदारों के पीछे कलाकारों के अपने जीवन के अनुभव भी कई बार प्रेरणा बनते हैं।
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