
नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में सोमवार (10 अगस्त) को दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान जज अजय गुप्ता ने पेपर लीक मामले में गिरफ्तार 3 आरोपियों की CBI जांच में मदद करने के लिए अपनी मर्ज़ी से लाई डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग टेस्ट करवाने की मांग खारिज कर दी.
इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में जांच कर रही CBI द्वारा आरोपियों के खिलाफ दाखिल की गई 20,000 पन्नों की चार्जशीट पर संज्ञान लेने का आदेश भी 12 अगस्त तक के लिए टाल दिया. कोर्ट ने कहा कि डॉक्यूमेंट्स बहुत बड़े और भारी-भरकम हैं और उनकी आगे जांच की ज़रूरत है. कोर्ट ने आरोपियों की हिरासत भी 12 अगस्त तक बढ़ा दी.
सुनवाई के दौरान CBI ने तीनों आरोपियों की लाई डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग टेस्ट करवाने की अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि जांच एजेंसी कैसे जांच करे. सीनियर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर वीके पाठक ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट को बताया कि ऐसी प्रक्रिया का अनुरोध करना CBI का अधिकार है. उन्होंने तर्क दिया कि एजेंसी ने सभी आरोपियों के खिलाफ दोष साबित करने वाले सबूत इकट्ठा कर लिए हैं और लाई डिटेक्टर या ब्रेन-मैपिंग जांच के ज़रिए जांच करने के लिए कुछ भी नहीं बचा है.
CBI ने कहा कि इस स्टेज पर पूरी कोशिश बेकार होगी और उसे मेंटेन नहीं किया जा सकता. जांच एजेंसी ने कहा कि अगर ऐसा है भी, तो आरोपी सिर्फ़ बचाव पक्ष के सबूत के स्टेज पर ही ऐसी रिक्वेस्ट कर सकते हैं. इसके साथ ही CBI ने अर्जी देने के लिए तीनों आरोपियों पर भारी जुर्माना लगाने की भी मांग की.
कोर्ट ने 4 अगस्त को आरोपियों की अर्जी पर CBI से जवाब मांगा था. आरोपियों ने अपनी मर्ज़ी से बिना किसी दबाव के टेस्ट करवाने की मांग की थी, ताकि अपनी नेकनीयती साबित की जा सके और जांच एजेंसी को निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करने में मदद की जा सके.
आरोपियों के वकील एपी सिंह के ज़रिए दायर की गई अर्जी में कहा गया था कि याचिकाकर्ता शुरू होने से ही अपनी बेगुनाही पर अड़े रहे हैं और लगातार यह कहते रहे हैं कि उन्होंने कोई जुर्म किया और न ही उनमें हिस्सा लिया है. तीनों ने अपनी मर्ज़ी से किसी भी सरकारी लैब में साइंटिफिक जांच के लिए खुद को पेश करके जांच एजेंसी की मदद करने की कोशिश की, ताकि एजेंसी हर कानूनी जांच का रास्ता देख सके.
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