
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को संसद के दोनों सदनों में जारी गतिरोध को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद को चलाने के लिए जरूरी चर्चा से बच रही है और विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं दे रही है। खरगे ने कहा कि विपक्ष बहस चाहता है और उसकी मांग सिर्फ इतनी है कि गृह मंत्री अमित शाह छात्रों के साथ कथित अन्याय और ज्यादती के मुद्दे पर सदन में बयान दें।
खरगे ने कहा कि विपक्ष पिछले 17 दिनों से अमित शाह से सदन में आकर छात्रों के साथ हुए कथित अन्याय और ज्यादती पर बयान देने की मांग कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार दूसरे मुद्दों पर बयान देती है, लेकिन इस मामले पर चर्चा क्यों नहीं करना चाहती। खरगे के मुताबिक, विपक्ष केवल बयान और चर्चा की मांग कर रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि दोनों सदनों के कामकाज में बाधा के लिए सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। खरगे ने कहा कि विपक्ष बहस चाहता है, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर जवाब नहीं दे रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों और युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं करना चाहती।
खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर संसद की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सदन में जवाब देने के बजाय प्रधानमंत्री रात में इंस्टाग्राम पर रील बना रहे हैं। उन्होंने इसे सांसदों और जनता का अपमान बताया और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन को सुचारू रूप से चलाना नहीं चाहते।
खरगे ने कहा कि सरकार को या तो सदन में आकर बयान देना चाहिए या फिर इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह घर से सरकार चला रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि विपक्ष के बोलने पर सदन में हंगामा कराया जाता है। खरगे ने राज्यसभा के सभापति को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्ष अपनी बात रखने की कोशिश करता है तो उसे पर्याप्त समय नहीं मिलता और सदन स्थगित कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों को सदन में अपनी आवाज उठाने का मौका मिलना चाहिए।
लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष 20 जुलाई को पेपर लीक के मुद्दे पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती को लेकर अमित शाह से बयान की मांग कर रहा है। दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है और विपक्ष अपनी मांग पर कायम है। इस दौरान ज्यादातर विधायी कामकाज हंगामे के बीच ही हो रहा है।
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