
तिरुवनंतपुरम । पिनाराई विजयन (Pinarayi Vijayan) ने कहा कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाएं (Remove CEC Gyanesh Kumar) और एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाएं (Halt SIR Process) ।
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाए जाने की बात कही है। उन्होंने एसआईआर की प्रक्रिया को रोकने की भी बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नाम बहाल करने की भी बात कही है। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने और एसआईआर से जुड़े फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के खुलासे चुनाव आयोग के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाया जाना चाहिए, एसआईआर को रोका जाना चाहिए, गलत तरीके से हटाए गए लोगों के वोटिंग अधिकार बहाल किए जाने चाहिए और चुनाव आयोग की आजादी और विश्वसनीयता की रक्षा की जानी चाहिए।” पिनाराई विजयन ने लिखा, “वोट देने का अधिकार भारत के लोगों का है। इसे भाजपा और संघ परिवार के राजनीतिक हितों को साधने के लिए बदला या इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।”
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के दोनों सहयोगी चुनाव आयुक्त ने आरोप लगाए हैं कि कई बार उनसे बिना पूछे या सहमति के ही फैसले लिए गए हैं। इसी वजह से इस मामले पर विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग कर रहा है। इस मामले में विपक्षी दलों के द्वारा लगातार बयान सामने आ रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्षी दलों का इंडिया ब्लॉक नए सिरे से प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। कांग्रेस की पहल पर विपक्षी दलों ने संशोधित नोटिस लाने पर सहमति बनाई है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, अगले दो सप्ताह के भीतर राज्यसभा में नया नोटिस सौंपा जाएगा, जिसमें हालिया घटनाक्रमों और नए तथ्यों को भी शामिल किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में चर्चा हुई है। इसके बाद ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं के हस्ताक्षर जुटाकर संशोधित नोटिस दिया जाएगा। नोटिस देने के लिए संसद का सत्र चलना जरूरी नहीं होता। विपक्ष ने इससे पहले 24 अप्रैल को राज्यसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिया था। उस नोटिस पर विपक्ष के 73 सांसदों के हस्ताक्षर थे और वह अभी भी लंबित है। बाद में उस नोटिस पर हस्ताक्षर करने वाले सात सांसद पाला बदल चुके हैं। इसी वजह से विपक्ष अब नए सिरे से समर्थन जुटाकर संशोधित नोटिस लाने की तैयारी कर रहा है।
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