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एफसीआरए विधेयक पर सरकार स्थिति स्पष्ट करे – विपक्षी सांसद

August 10, 2026


नई दिल्ली । विपक्षी सांसदों (Opposition MPs) ने कहा कि एफसीआरए विधेयक पर (On FCRA Bill) सरकार स्थिति स्पष्ट करे (Government should clarify its Position) ।


  • संसद के मानसून सत्र में एफसीआरए विधेयक, अयोध्या में भूमि खरीद-फरोख्त, विपक्षी दलों के विरोध और झारखंड के छात्र आंदोलन पर सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने एफसीआरए विधेयक पर सरकार से स्पष्टता की मांग की है। उन्होंनेसरकार से पारदर्शिता बरतने और नियम को सभी संगठनों पर समान रूप से लागू करने की मांग की है। सपा सांसद डिंपल यादव ने सवाल उठाया कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एक पंजीकृत संगठन है या नहीं। उन्होंने कहा कि कानून और नियम सभी के लिए समान होने चाहिए तथा पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एफसीआरए बिल के जरिए एनजीओ और विभिन्न संगठनों के तहत पंजीकृत संपत्तियों को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है और इससे लोगों में डर का माहौल पैदा हो सकता है।

    सपा सांसद ने अयोध्या से जुड़े जमीन और ट्रस्ट के मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से एसआईटी कमेटी गठित है, लेकिन जमीन के लेन-देन को लेकर उठे सवालों का अब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। उनके मुताबिक, कुछ संपत्तियों को कथित तौर पर वास्तविक कीमत से कई गुना अधिक दाम पर खरीदे जाने के आरोप हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि करीब 2 करोड़ रुपये की जमीन 16 करोड़ रुपये में और 5 करोड़ रुपये की जमीन कथित तौर पर 25, 30 या 40 करोड़ रुपये में खरीदे जाने के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने दान राशि में कथित अनियमितताओं और सोने-चांदी की वस्तुओं के गायब होने से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया और कहा कि इन मामलों का उचित हिसाब और रिकॉर्ड सामने आना चाहिए।

    कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि विपक्ष की मांगों में बदलाव के बावजूद सरकार की ओर से जरूरी जवाब नहीं मिला है। पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी, जिसके बाद गृह मंत्री अमित शाह से 20 जुलाई की घटनाओं को लेकर सदन में स्पष्टीकरण देने की मांग की जा रही है। रेड्डी ने कहा कि जब तक गृह मंत्री सदन में आकर इस मुद्दे पर जवाब नहीं देते, विपक्ष सरकार के साथ सदन चलाने में सहयोग नहीं करेगा और सरकार द्वारा लाए जा रहे विधेयकों में भी भागीदारी नहीं करेगा।

    झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर जेएमएम सांसद महुआ माजी ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के साथ बैठक के बाद छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार किए जाने की घोषणा हुई थी और उस समय छात्रों ने भी इसे माना था। हालांकि, बाद में बातचीत के बाद छात्रों ने फिर विरोध मार्च निकालने का फैसला किया। महुआ माजी ने कहा कि परीक्षा को रद्द करने का फैसला अदालत के निर्देश के बिना सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने जेपीएससी की पिछली परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और धांधली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा मामले में सीआईडी जांच कर रही है और सरकार ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट प्रक्रिया के जरिए 90 दिनों के भीतर मामले को निपटाने का निर्देश दिया है। हालांकि, छात्रों को जांच के बाद न्याय मिलने की गारंटी को लेकर सवाल बने हुए हैं।

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