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बच्चों के टीकाकरण पर ट्रंप का बड़ा दांव, MMR वैक्सीन को अलग करने के आदेश से अमेरिका में छिड़ी नई बहस

August 11, 2026

नई दिल्ली। अमेरिका(America) में बच्चों के टीकाकरण (vaccination)को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप(President Donald Trump) के एक नए आदेश ने स्वास्थ्य जगत में बहस तेज कर दी है। ट्रंप प्रशासन ने बचपन में दिए जाने वाले टीकों की व्यवस्था में बदलाव की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए खसरा गलसुआ और रूबेला से बचाने वाले MMR टीके को अलग अलग देने की योजना बनाने का निर्देश दिया है। आदेश में बच्चों को जहां संभव हो एक ही चिकित्सकीय दौरे में कई टीके देने के बजाय अलग अलग समय पर टीके लगाने की बात कही गई है। ट्रंप इसे अभिभावकों के अधिकार और विज्ञान की जीत बता रहे हैं लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस फैसले को लेकर चिंता जताई है।

ट्रंप प्रशासन के आदेश के मुताबिक अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग को MMR टीके के तीन अलग अलग विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने को कहा गया है। फिलहाल अमेरिका में खसरा गलसुआ और रूबेला के लिए संयुक्त MMR टीका इस्तेमाल किया जाता है। सरकार से इस दिशा में शोध और योजना तैयार करने को कहा गया है ताकि भविष्य में इन बीमारियों के टीके अलग अलग दिए जा सकें। इसके साथ ही बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम में टीकों के बीच अंतर बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया है।

यही फैसला स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण बन रहा है। विशेषज्ञों का तर्क है कि टीकाकरण में अनावश्यक देरी होने से बच्चों के उन बीमारियों की चपेट में आने का जोखिम बढ़ सकता है जिनसे टीके सुरक्षा देते हैं। अगर किसी बच्चे को एक बीमारी से बचाने वाला टीका मिल गया लेकिन दूसरे टीके के लिए अगली चिकित्सकीय मुलाकात तक इंतजार करना पड़ा तो उस दौरान संक्रमण का खतरा बना रह सकता है। बच्चों को किस उम्र में कौन सा टीका और किस अंतराल पर दिया जाना चाहिए इसकी सिफारिशें लंबे वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर तैयार की जाती हैं।

इस पूरे विवाद में ऑटिज्म का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में आ गया है। ट्रंप ने वैक्सीन की संख्या और उन्हें दिए जाने के समय को अमेरिका में बढ़ रहे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से जोड़ने की बात कही है। हालांकि वैज्ञानिक सहमति और दशकों के शोध में वैक्सीन और ऑटिज्म के बीच कोई प्रमाणित संबंध नहीं पाया गया है। इसी वजह से स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस तरह के दावों पर चिंता जताई है और कहा है कि इससे अभिभावकों के बीच अनावश्यक डर और भ्रम पैदा हो सकता है।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की ओर से भी इस फैसले की आलोचना सामने आई है। संगठन के अध्यक्ष डॉ. एंड्रयू रेसिन ने चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी नीति से उस समय अनिश्चितता और भ्रम बढ़ सकता है जब बच्चों के टीकाकरण को लेकर स्पष्ट वैज्ञानिक मार्गदर्शन पहले से मौजूद है। वहीं रिपब्लिकन पार्टी के भीतर से भी ट्रंप के फैसले पर सवाल उठे हैं। सीनेट की स्वास्थ्य समिति के रिपब्लिकन अध्यक्ष और डॉक्टर बिल कैसिडी ने कहा है कि टीके सुरक्षित हैं और ऑटिज्म का कारण नहीं बनते।

अमेरिका में टीकाकरण नीति को लेकर एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि स्कूलों में बच्चों के टीकाकरण को अनिवार्य करने का अधिकार मुख्य रूप से राज्यों के पास है। संघीय सरकार सीधे तौर पर सभी राज्यों पर एक समान स्कूल वैक्सीन नीति लागू नहीं कर सकती। ट्रंप के आदेश में उन राज्यों से अपनी नीतियों में बदलाव पर विचार करने को कहा गया है जहां स्कूलों में टीकाकरण अनिवार्य है। इससे इस मुद्दे पर केंद्र और राज्यों के अधिकार को लेकर भी बहस बढ़ सकती है।

बच्चों के टीकाकरण को लेकर ट्रंप प्रशासन का यह पहला बड़ा विवाद नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर के कार्यकाल में भी वैक्सीन से जुड़ी सलाहकार व्यवस्था में बदलाव किए गए थे। प्रशासन ने वैक्सीन सलाहकार समिति के सदस्यों को हटाकर नए सदस्यों की नियुक्ति की थी और बाद में कुछ सिफारिशों को संघीय अदालत में चुनौती का सामना करना पड़ा।

  • ट्रंप का कहना है कि उनका उद्देश्य अभिभावकों को ज्यादा विकल्प देना और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े फैसलों में उनकी भूमिका मजबूत करना है। दूसरी ओर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टीकाकरण संबंधी नीतियां राजनीतिक विचारों के बजाय मजबूत वैज्ञानिक प्रमाणों और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देकर तय की जानी चाहिए। ऐसे में MMR वैक्सीन को अलग अलग देने और टीकों के बीच अंतर बढ़ाने की योजना आने वाले समय में अमेरिका में स्वास्थ्य नीति और बच्चों के टीकाकरण को लेकर एक बड़ी बहस का विषय बन सकती है।

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