नई दिल्ली। नसीरुद्दीन शाह(Naseeruddin Shah) और पीयूष मिश्रा(Piyush Mishra) के बीच चल रहे बयानबाजी के विवाद में अब अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत(MP Kangana Ranaut) भी कूद पड़ी हैं। कंगना ने पीयूष मिश्रा के बयान का समर्थन करते हुए नसीरुद्दीन शाह पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह को लोमड़ी तक कह दिया और कहा कि उन्हें गर्व है कि वह जिस देश की रोटी खाती हैं उसके लिए आवाज उठाती हैं और जरूरत पड़ने पर उसके लिए लड़ती हैं। कंगना की इस टिप्पणी के बाद बॉलीवुड से जुड़े इस विवाद ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है।
दरअसल पूरा मामला छात्र आंदोलनों और फिल्म इंडस्ट्री की कथित चुप्पी से जुड़ा है। नसीरुद्दीन शाह ने छात्र प्रदर्शन के दौरान बॉलीवुड कलाकारों के छात्रों के समर्थन में खुलकर सामने नहीं आने पर सवाल उठाया था। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री की तुलना ऐसे कुत्ते से की थी जिसके मुंह में हड्डी हो और वह भौंक नहीं सकता। नसीरुद्दीन शाह की इस टिप्पणी के बाद पीयूष मिश्रा ने भी उन पर पलटवार किया और झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी चुप्पी को लेकर सवाल खड़े किए।
अब कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर पीयूष मिश्रा के रुख का समर्थन करते हुए नसीरुद्दीन शाह को निशाने पर लिया। कंगना ने कहा कि आज के समय में किसी को कुत्ता कहना भी तारीफ माना जा सकता है क्योंकि कुत्ते अपनी वफादारी और मासूमियत के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि हर कोई किसी न किसी का कुत्ता है, लेकिन उन्हें इस बात पर गर्व है कि वह अपने देश के लिए बोलती हैं और उसकी रखवाली करती हैं।
कंगना ने नसीरुद्दीन शाह पर निशाना साधते हुए आगे कहा कि नसीर साहब देश की रोटी खाते हैं लेकिन पड़ोसी देश के लिए लड़ते हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी तुलना नसीरुद्दीन शाह से करते हुए कहा कि वह उनकी तरह लोमड़ी बनने के बजाय कुत्ता बनना पसंद करेंगी। कंगना की इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज होने की संभावना है और लोग अपने-अपने तरीके से इस विवाद पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
इससे पहले पीयूष मिश्रा ने भी नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने झारखंड के छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए पूछा था कि अगर फिल्म इंडस्ट्री के कुछ कलाकार छात्रों के समर्थन में आवाज नहीं उठा रहे थे तो दूसरे कलाकार कहां थे। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के कुत्ते और हड्डी वाले बयान को आधार बनाकर उनसे ही सवाल किया कि जब छात्र विरोध कर रहे थे तब वे आवाज उठाने के लिए आगे क्यों नहीं आए।
पीयूष मिश्रा ने अपने बयान में छात्र आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की प्राथमिकताओं पर भी टिप्पणी की थी। उन्होंने दिल्ली और मुंबई में हुए छात्र प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ छात्र विरोध प्रदर्शन से ज्यादा पिज्जा और बर्गर पर ध्यान दे रहे थे। उनके इस बयान ने भी विवाद को और हवा दी।
अब कंगना रनौत के नसीरुद्दीन शाह पर सीधे हमले के बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक तथा व्यक्तिगत रंग लेता दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहां कंगना ने देश और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट किया है, वहीं दूसरी ओर नसीरुद्दीन शाह की पुरानी टिप्पणी को लेकर बहस जारी है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर दोनों पक्षों की ओर से और बयान सामने आने की संभावना बनी हुई है।