नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा विवाद (India-China border dispute) को लेकर चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स (Global Times) ने अरुणाचल प्रदेश की क्षेत्रीय पार्टी पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) के दावों पर सवाल उठाए हैं। अखबार ने भारतीय मीडिया और कुछ क्षेत्रीय राजनीतिक ताकतों पर सीमा से जुड़ी कथित घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि सीमा विवाद को दोनों देशों के व्यापक रिश्तों पर ‘हाईजैक’ नहीं करने देना चाहिए।
हालांकि, ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में ताक्सिंग इलाके में वास्तव में क्या हुआ, इस पर चीन की सरकार की ओर से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।
PPA के दावे से शुरू हुई चर्चा का दावा
ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में अरुणाचल प्रदेश को चीन के आधिकारिक रुख के अनुरूप ‘तथाकथित’ बताते हुए लिखा कि हालिया अटकलें पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल के दावे के बाद शुरू हुईं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व मंत्री और पार्टी सलाहकार काहफा बेंगिया के नेतृत्व वाली PPA की चार सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने 10 जुलाई को ताक्सिंग इलाके का दौरा किया था। इसके बाद समिति ने दावा किया कि भारतीय सेना को कुछ पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक पहुंचने से रोका गया।
PPA ने अगस्त 2026 में ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताक्सिंग क्षेत्र में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की कथित घुसपैठ का मुद्दा उठाया था।
चीन अरुणाचल को बताता है ‘दक्षिणी तिब्बत’
चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है और इसे ‘जंगनान’ या ‘दक्षिणी तिब्बत’ कहता है। वहीं भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।
PPA के दावों पर चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से कोई सीधा जवाब नहीं दिया गया। चीनी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को सीमा पर स्थिति को सामान्य बताया था, लेकिन क्षेत्र में चीनी सैनिकों की मौजूदगी बढ़ने के सवाल पर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।
चीनी विशेषज्ञ ने भारतीय मीडिया पर उठाए सवाल
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, त्सिंगहुआ यूनिवर्सिटी के नेशनल स्ट्रैटेजी इंस्टीट्यूट के रिसर्च डिपार्टमेंट के निदेशक कियान फेंग ने कहा कि दोनों देशों के बीच निर्धारित चैनलों से बातचीत जारी रहना इस बात का संकेत है कि सीमा पर हालात उतने खराब नहीं हैं, जितना कुछ भारतीय मीडिया में बताया गया।
रिपोर्ट में भारत द्वारा अरुणाचल प्रदेश में 27 स्थानों के लिए ‘स्टैंडर्ड’ नाम घोषित किए जाने का भी जिक्र किया गया और चीन की ओर से इसे बेकार कदम बताया गया।
चीन ने भारत की घरेलू राजनीति पर भी साधा निशाना
ग्लोबल टाइम्स ने भारत की सीमा संबंधी चिंताओं का सीधे जवाब देने के बजाय यह तर्क दिया कि देश की घरेलू राजनीति में सीमा और सुरक्षा के मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता है।
झेजियांग इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और शंघाई एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज के रिसर्च फेलो हू झियोंग ने अखबार से कहा कि आर्थिक और सामाजिक समस्याओं के बीच लोगों का ध्यान दूसरी ओर खींचने के लिए चीन या पाकिस्तान से जुड़े सीमा मुद्दों को उठाया जा सकता है।
उन्होंने आर्थिक दबाव, विदेशी निवेश और घरेलू कारोबारी माहौल से जुड़ी चिंताओं को भी इसका एक कारण बताया।
हू झियोंग ने कहा कि सीमा विवाद भारत-चीन संबंधों का केवल एक हिस्सा है। दोनों देशों के रिश्तों में राजनीति, अर्थव्यवस्था, कूटनीति, सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई दूसरे पहलू भी हैं।
उनका कहना था कि सीमा विवाद को पूरे द्विपक्षीय रिश्तों को ‘हाईजैक’ नहीं करने देना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत में कुछ राजनीतिक ताकतें महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत से पहले बढ़त हासिल करने के लिए कई बार सीमा मुद्दों का इस्तेमाल करती रही हैं।
ताक्सिंग पर चीन की तरफ से अभी भी तस्वीर साफ नहीं
ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय मीडिया और PPA के दावों पर सवाल जरूर उठाए हैं, लेकिन रिपोर्ट में ताक्सिंग इलाके में भारतीय पेट्रोलिंग को कथित तौर पर रोके जाने के आरोपों का चीन की ओर से कोई ठोस तथ्यात्मक खंडन या घटनाक्रम का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया।
ऐसे में फिलहाल विवाद का एक पक्ष PPA और भारतीय मीडिया की रिपोर्टों पर आधारित है, जबकि चीन की ओर से सीमा पर स्थिति सामान्य होने की बात कही गई है। वास्तविक स्थिति को लेकर तस्वीर संबंधित आधिकारिक और स्वतंत्र जानकारी सामने आने के बाद ही ज्यादा स्पष्ट हो सकेगी।
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