
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (17 अगस्त) केंद्र सरकार को हाथी कॉरिडोर का नया सर्वे करने और उनके बिना रुकावट आवागमन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि फ़सल को होने वाले नुकसान का हवाला देकर वन्यजीवों के रास्तों को रोकना सही नहीं ठहराया जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारें महज इसलिए हाथी के रास्ते में रुकावटें पैदा नहीं कर सकती कि फसलें बर्बाद हो रही हैं. CJI सूर्यकांत ने कहा कि हम इस बात को लेकर बहुत साफ़ हैं कि वन्यजीवों के रास्ते में रुकावटें नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हाथियों के झुंड लंबी दूरी तक यात्रा करते हैं. कोई भी राज्य यह नहीं कह सकता कि फ़सलें बर्बाद हो रही हैं, इसलिए उनके रास्ते में रुकावटें होनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह सभी राज्यों में हाथी कॉरिडोर का नया सर्वे करे और रुकावटों एवं उनके बिना रुकावट आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों पर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट सौंपे.
CJI सूर्यकांत ने आदेश में दर्ज किया कि हमें बताया गया है कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अलग-अलग राज्यों से गुजरने वाले हाथी कॉरिडोर को बिना रुकावट और बाधा-मुक्त रखने के लिए ज़रूरी गाइडलाइंस जारी की हैं. हालांकि कुछ स्थानीय कारणों से हाथी कॉरिडोर में बाधाएं आई हैं या उन्हें ब्लॉक किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम भारत सरकार और संबंधित मंत्रालय को निर्देश देते हैं कि वे नया सर्वे करें और एक विस्तृत सर्वे रिपोर्ट सौंपें, जिसमें ऐसी रुकावटों को रोकने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदम और पहल शामिल हों. इसके साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि स्टेटस रिपोर्ट में हथियारों के इस्तेमाल या किसी भी तरह की ज़बरदस्ती वाली कार्रवाई की स्थिति के बारे में भी बताया जाना चाहिए.
सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि कई बार हाथियों को भीड़ की तरह खदेड़ा जाता है, जिससे असल में स्थिति और बिगड़ जाती है. उन्होंने कहा कि हाथियों की स्वाभाविक आवाजाही के दौरान हथियारों के इस्तेमाल को रोकने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए. खासकर, इस संबंध में हुल्ला पार्टियों आदि पर रोक लगाने की ज़रूरत है. CJI सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे उपाय किए जाएं और स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट को दी जाए. इस मामले में अगली सुनवाई छह हफ़्ते बाद होगी.
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved