
नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री (Bollywood Actress) ईशा कोपिकर (Isha Koppikar) इन दिनों सोशल मीडिया पर अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। अभिनेत्री को अंधभक्त कहकर निशाना बनाए जाने के बाद उन्होंने इस टिप्पणी पर अपना पक्ष रखा। ईशा ने कहा कि यदि देश से प्यार करना और देश के लिए अच्छा सोचना भक्ति है, तो वह अंधभक्त कहलाने (Blind Devotee) को भी स्वीकार (Accept) करने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान को अभिनेत्री और भाजपा सांसद (BJP MP) कंगना रनौत का समर्थन (Support) मिला है।
कंगना रनौत ने ईशा कोपिकर के वीडियो को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किया और उनके विचारों से सहमति जताई। कंगना ने कहा कि ईशा ने इस मुद्दे को अच्छी तरह समझाया है। इसके साथ ही उन्होंने अपने जीवन के कुछ अनुभवों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने स्कूल के समय भी गलत व्यवहार का विरोध किया था।
कंगना के अनुसार हाई स्कूल के दौरान उन्होंने एक ऐसे शिक्षक का विरोध किया था, जो प्रार्थना सभा के समय बच्चों के सिर पर डंडे से मारते थे। कंगना ने अपने बयान में 26/11 के आतंकी हमले की हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने और निर्भया के साथ हुई दरिंदगी का विरोध करने का भी उल्लेख किया।
कंगना ने कहा कि जिंदगी में उनके सामने आई परेशानियों और सीमाओं के लिए उन्होंने कभी अपने माता-पिता को जिम्मेदार नहीं ठहराया। इसके बजाय उन्होंने अपने परिवार को भी उस बेहतर जीवन तक पहुंचाने की कोशिश की, जिसे उन्होंने अपने लिए हासिल किया था। उन्होंने अपने विचारों में देश और देशवासियों के प्रति लगाव को भी प्रमुखता दी।
कंगना ने यह भी कहा कि वह जिन लोगों से मिलती हैं, उनकी भक्त बन जाती हैं और उनके प्रति सम्मान रखती हैं। उन्होंने अपने देश और अपने लोगों से प्यार की बात कही। साथ ही उन्होंने अपनी जिंदगी के प्रति भी लगाव व्यक्त किया। उनका यह बयान ईशा के उस विचार से जुड़ता हुआ नजर आया, जिसमें अभिनेत्री ने देश के प्रति अपने प्रेम को अपनी व्यक्तिगत भावना बताया था।
ईशा कोपिकर के अनुसार सोशल मीडिया पर उन्हें अंधभक्त कहकर निशाना बनाए जाने की स्थिति उस समय बनी, जब उन्होंने नीट विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का विरोध किया था। उन्होंने देश के खिलाफ बोलने वाले लोगों की आलोचना की थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा।
ईशा ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि वह देश में गलत होने पर उसके खिलाफ आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगी। उनका कहना था कि जब कुछ गलत होगा तो वह उसकी आलोचना करेंगी और जब कुछ अच्छा होगा तो उसकी खुलकर तारीफ भी करेंगी। इस तरह उन्होंने अपनी स्थिति को किसी एकतरफा समर्थन के बजाय अपने विचारों और देश के प्रति जिम्मेदारी से जोड़कर पेश किया।
इस पूरे मामले में ईशा कोपिकर और कंगना रनौत के बयानों का केंद्र देश प्रेम, विरोध की स्वतंत्रता और सकारात्मक कार्यों की सराहना रहा। दोनों अभिनेत्रियों ने अपने अलग-अलग अनुभवों और विचारों के माध्यम से यह बताया कि किसी व्यक्ति का किसी मुद्दे पर समर्थन या विरोध उसकी व्यापक सोच का हिस्सा हो सकता है।
ईशा के बयान पर कंगना का समर्थन सामने आने के बाद यह मामला मनोरंजन जगत और सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों के बयानों में अपने विचार व्यक्त करने, गलत चीजों के खिलाफ आवाज उठाने और देश के प्रति सम्मान बनाए रखने पर जोर दिया गया है। विवाद के बीच ईशा ने जिस तरह अंधभक्त शब्द को अपने नजरिए से परिभाषित किया, वहीं कंगना ने अपने अनुभव साझा करते हुए उनके विचारों का समर्थन किया।
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