
नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्ध का असर भारत की हवाई सेवाओं पर भी नजर आ रहा है। अप्रैल-जून की पहली पूरी तिमाही में भारतीय एयरलाइंस की अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में 26 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके उलट विदेशी एयरलाइंस ने 7 प्रतिशत ज्यादा यात्री ढोए। डीजीसीए के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान भारत से आने-जाने वाले कुल यात्रियों की संख्या भी 10.5 प्रतिशत घटकर 1.9 करोड़ से करीब 1.7 करोड़ रह गई है।
दुबई की एयरलाइन एमिरेट्स को इस दौरान फायदा हुआ। यूएई ने लंबे समय तक विदेशी एयरलाइंस की उड़ानों पर पाबंदियां रखीं। इसका फायदा एमिरेट्स को मिला और भारत आने-जाने वाले उसके यात्रियों की संख्या 7 प्रतिशत बढ़कर करीब 14.8 लाख हो गई। पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 13.8 लाख थी।
वहीं, अबू धाबी की एतिहाद पर इसका असर काफी कम रहा। अप्रैल-जून में भारत आने-जाने वाले उसके यात्रियों की संख्या पिछले साल की करीब 8.5 लाख से सिर्फ 1,939 कम रही। अमेरिका-ईरान संघर्ष से पहले से दबाव झेल रही भारतीय एयरलाइंस की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पिछले साल अप्रैल से पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने के कारण भारतीय एयरलाइंस की उत्तर भारत और पश्चिमी देशों के बीच उड़ानें प्रभावित हैं। दिल्ली इस नेटवर्क का बड़ा केंद्र है, जहां एयर इंडिया और इंडिगो की कई उड़ानें संचालित होती हैं।
एयर इंडिया ग्रुप (एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस) की अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में भी बड़ी गिरावट आई है। अप्रैल-जून 2026 में ग्रुप ने 27.6 लाख यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सफर कराया। पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 43.3 लाख थी। यानी करीब 36 प्रतिशत की कमी आई। एयर इंडिया ने पिछले साल जून में अहमदाबाद विमान हादसे के बाद भी कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें कम की थीं।
इंडिगो की अंतरराष्ट्रीय यात्री संख्या भी 15 प्रतिशत घटकर 33.4 लाख रह गई। अप्रैल-जून 2025 में यह आंकड़ा 39.5 लाख था। वहीं, कुछ विदेशी एयरलाइंस को इसका फायदा मिला। पश्चिमी एशिया की उड़ानें प्रभावित होने से उनके पास विमान उपलब्ध हुए। साथ ही, पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने का असर इन एयरलाइंस पर नहीं है। इसका फायदा उठाकर लुफ्थांसा, स्विस और ब्रिटिश एयरवेज ने भारत के लिए उड़ानें बढ़ाईं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved