
मुंबई। मुंबई पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापकों हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी समेत छह फरार आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल के जरिए कोर्ट के समन या वारंट जारी करवाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया है। इससे 26/11 के आतंकी हमलों में उनकी भूमिका के लिए उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया है।
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर उज्ज्वल निकम ने शुक्रवार को पुलिस की ओर से एक अंतरिम रिपोर्ट पेश की। यह रिपोर्ट इस साल जुलाई में फरार आरोपियों के खिलाफ जारी उस उद्घोषणा आदेश के बारे में थी, जिसके तहत उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू की जानी है।
आतंकवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही स्पेशल कोर्ट में निकम ने कहा, ‘हमने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर पाकिस्तान में रह रहे आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल के जरिए उद्घोषणा आदेश तामील कराने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। 3 अगस्त को गृह मंत्रालय ने हमारी अपील को स्वीकार कर लिया था। इस मामले की स्थिति बताने के लिए समय मांगा था।’
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 356 के तहत, उन घोषित अपराधियों के खिलाफ उनकी गैर-मौजूदगी में भी पूरा आपराधिक मुकदमा चलाने का प्रावधान है, जो मुकदमे से बचने के लिए भाग गए हैं। जिनके तुरंत गिरफ्तार होने की कोई संभावना नहीं है।
26/11 हमलों के मामले की सुनवाई कर रही अदालत ने सईद, लखवी और अन्य फरार आरोपियों साजिद मीर, अबू अलकामा, आसिम उर्फ अबू कहफा और मेजर अब्दुर रहमान पाशा के खिलाफ उद्घोषणा आदेश जारी किए थे। ये सभी पाकिस्तानी नागरिक हैं।
हमले में इन लोगों की भूमिका का जिक्र आतंकवादी अजमल कसाब और आरोपी से सरकारी गवाह बने डेविड हेडली ने किया था। कसाब अकेला ऐसा पाकिस्तानी आतंकवादी था जो नवंबर 2008 में 26/11 के मुंबई हमलों के दौरान जिंदा पकड़ा गया था। बड़े पैमाने पर हत्या और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी पाए जाने पर उसे मौत की सजा सुनाई गई और 21 नवंबर 2012 को पुणे की यरवदा सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई।
2008 के मुंबई आतंकी हमलों में कुल 166 लोग मारे गए थे (जिनमें छह अमेरिकी भी शामिल थे)। इन हमलों में 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों ने मुंबई की मशहूर और अहम जगहों पर लोगों को निशाना बनाते हुए 60 घंटे से ज्यादा समय तक घेराबंदी की थी।
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