
नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा (Congress MP Pawan Kheda) ने कहा कि कोई क्या खाएगा और क्या नहीं खाएगा (What Someone Eats or does not Eat) यह उसकी पसंद पर निर्भर है (Depends on their Personal Choice) ।
कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने सोमवार को दिल्ली में कई अहम मुद्दों पर केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने अयोध्या में मछली भोज विवाद, महिला आरक्षण, एनएसए अजित डोभाल के चीन दौरे और तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी के अमेरिका दौरे को रद्द करने के मामले पर अपनी बात रखी। अयोध्या में कांग्रेस के यूपी अध्यक्ष अजय राय के स्वागत के दौरान हुए मछली भोज पर पवन खेड़ा ने कहा कि जिस निषाद जी ने इस कार्यक्रम की मेजबानी की है, वह हाल ही में भाजपा से आए हैं। अगर कोई अपने घर या कार्यक्रम में किसी को बुलाता है तो क्या आप तय करेंगे कि क्या पकाना है और क्या नहीं? उन्होंने कहा, “अजय राय शाकाहारी हैं, वो अलग बात है।
किसी को भी ये हक नहीं होना चाहिए कि कोई क्या खाएगा और क्या नहीं खाएगा, लेकिन अगर निषाद समुदाय मछली नहीं खाएगा तो क्या आरएसएस तय करेगा कि निषाद समुदाय को क्या और कब खाना चाहिए? वो खुद को समझते क्या हैं? हम आज तक नहीं समझ पाए कि ये कौन होते हैं यह तय करने वाले कि मुसलमान हिजाब पहनें या निषाद मछली खाएं। आप होते कौन हैं और क्यों? इसीलिए राहुल गांधी बार-बार आरएसएस को निशाना बनाते हैं और कहते हैं कि वे सबकी निजी जिंदगी में घुसकर यह तय करना चाहते हैं कि कौन क्या खाए, कब खाए, क्या पहने और कौन सी भाषा बोले। यह नहीं चल सकता।”
भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी द्वारा कांग्रेस से 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के समर्थन की अपील पर पवन खेड़ा ने कहा कि यह बिल 2023 में पास हुआ था। लोकसभा में 20 सितंबर को, राज्यसभा में 21 सितंबर को और राष्ट्रपति ने 24-25 सितंबर के आसपास इसे मंजूरी दी थी। पवन खेड़ा ने सवाल उठाया, “अगर सरकार गंभीर थी, तो अप्रैल 2026 तक बिल के साथ क्या कर रही थी? एक कानून बना, लेकिन तीन साल तक उसे नोटिफाई तक नहीं होने दिया। अब वे परिसीमन और जनगणना के पीछे छिप रहे हैं। हम फिर से कहते हैं कि इसे मौजूदा सीटों पर तुरंत लागू किया जाए।”
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के भारत-चीन सीमा वार्ता के लिए चीन जाने पर पवन खेड़ा ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में जो विशेष प्रतिनिधि तंत्र बनाया गया था, वह सीमा के समाधान के लिए था। शब्द पर ध्यान दीजिए- ‘समाधान’। लेकिन समय के साथ इसे सीमा प्रबंधन तक सीमित कर दिया गया है। विवाद को सुलझाना नहीं, बल्कि सिर्फ उसका प्रबंधन करना तक सीमित कर दिया गया है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा केंद्र द्वारा मानदंडों के अनुरूप न होने के कारण अनुमति न मिलने के बाद अपना अमेरिका दौरा रद्द करने पर पवन खेड़ा ने कहा कि यह बहुत अजीब है। उन्हें बताना चाहिए कि पिछले 12 सालों में भाजपा के मुख्यमंत्रियों के कितने विदेशी दौरों पर विदेश मंत्रालय ने ऐसी टिप्पणी की है। यह सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए।
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