
नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (Maharashtra Food And Drug Administration) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) की कार्यशैली और ईमानदारी (Honesty) की सार्वजनिक रूप से सराहना की है। मुंढे अपने सख्त प्रशासनिक रवैये (Administrative Approach) और जिम्मेदारी निभाने के तरीके को लेकर चर्चा में हैं। उनके काम को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक स्तर (Public Level) पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं (Reactions) सामने आ रही हैं।
मनोज बाजपेयी ने बातचीत के दौरान तुकाराम मुंढे का उदाहरण देते हुए कहा कि मौजूदा समय में किसी अधिकारी का अपनी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाना भी लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। उन्होंने इस स्थिति को समाज के मौजूदा नजरिए से जोड़कर देखा और सवाल उठाया कि आखिर सामान्य रूप से अपना कर्तव्य निभाना भी आज असाधारण क्यों माना जाने लगा है।
अभिनेता के अनुसार, जब किसी पुलिस अधिकारी या प्रशासनिक अधिकारी को कोई जिम्मेदारी सौंपी जाती है तो उससे अपेक्षा होती है कि वह अपने दायित्व का निष्पक्ष तरीके से पालन करेगा। लेकिन जब कोई अधिकारी पूरी निष्ठा के साथ काम करता है और अपने फैसलों तथा कार्रवाई को लेकर दृढ़ रहता है तो वह चर्चा का विषय बन जाता है।
मनोज बाजपेयी ने इसी संदर्भ में तुकाराम मुंढे का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ईमानदारी और लगन से काम करने वाला व्यक्ति आज कई बार वायरल होकर सेलिब्रिटी जैसी पहचान हासिल कर लेता है। उनके मुताबिक यह स्थिति समाज में सामान्य प्रशासनिक जिम्मेदारी और ईमानदार कार्यशैली को लेकर बदलती धारणा को दर्शाती है।
तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। विभाग का काम खाद्य पदार्थों और दवाओं से संबंधित सुरक्षा तथा निर्धारित नियमों के पालन को सुनिश्चित करना है। ऐसे में विभागीय अधिकारियों की कार्रवाई का सीधा संबंध सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ताओं के हितों से जुड़ा होता है।
मुंढे की कार्यशैली को लेकर हाल के दिनों में मनोरंजन जगत की हस्तियों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। इससे उनकी प्रशासनिक भूमिका आम लोगों के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के बीच भी चर्चा में आई है। मनोज बाजपेयी की टिप्पणी इसी क्रम में देखी जा रही है।
मुंढे का नाम पहले भी प्रशासनिक सेवा में सख्त और सक्रिय अधिकारी के तौर पर चर्चा में रहा है। उनकी कार्यशैली में नियमों के पालन, जवाबदेही और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने की छवि प्रमुख रही है। हालांकि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई का मूल्यांकन संबंधित नियमों, तथ्यों और आधिकारिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाना जरूरी है।
इसी बीच मनोज बाजपेयी अपने आगामी फिल्म प्रोजेक्ट को लेकर भी चर्चा में हैं। वह बेन रेखी के निर्देशन में बनी फिल्म लास्ट मैन इन टावर में नजर आएंगे। फिल्म अरविंद अडिगा के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। इसमें दिव्या दत्ता और बोमन ईरानी भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे।
फिल्म में मनोज बाजपेयी मास्टरजी नाम के सेवानिवृत्त शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। कहानी एक इमारत के निवासियों और उनके बीच पैदा होने वाले मतभेदों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है। फिल्म 11 सितंबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
तुकाराम मुंढे को लेकर मनोज बाजपेयी की टिप्पणी का व्यापक अर्थ प्रशासनिक जिम्मेदारी और सामाजिक अपेक्षाओं से जुड़ा है। अभिनेता ने यह रेखांकित किया कि ईमानदारी, निष्ठा और जिम्मेदारी से काम करना किसी भी सार्वजनिक पद की बुनियादी अपेक्षा होनी चाहिए। उनके बयान ने इसी सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है कि समाज में कर्तव्यनिष्ठा को सामान्य व्यवस्था का हिस्सा बनाने के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं।
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