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ये पॉलिटिक्स है प्यारे

September 07, 2026


छात्रों की गंूज को लेकर पूरी कांग्रेस एक
19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी आएंगे और जेन-जी से संवाद करेंगे। कांग्रेसी भले ही मुंह पर कहते फिर रहे हैं कि इस आयोजन में किसी प्रकार की राजनीति नहीं होगी, लेकिन कोई राजनेता आए और राजनीतिक चकल्लस न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। फिलहाल तो कांग्रेसी एक मुंह से बोल रहे हैं कि कैसे भी हो राहुल गांधी के कार्यक्रम को सक्सेस करना है, क्योंकि यह कार्यक्रम 2028 में कांग्रेस के लिए सरकार का दरवाजा साबित हो सकता है। सभी कांग्रेसी एकजुट होकर लगे हुए हैं, कहीं से कोई गिला-शिकवा भी नजर नहीं आ रहा है। हालांकि स्थानीय तौर पर चिंटू चौकसे और विपिन वानखेड़े के पास बड़ी जवाबदारी है, जिसको दोनों ने बांट लिया है और युवाओं को जोड़ना शुरू कर दिया है। सवाल यहां उठ रहा है कि प्रदेश कांग्रेस के किसी बड़े नेता ने अभी तक यहां आकर कोई बात नहीं कही है। हो सकता है उन्होंने इंदौरी नेताओं पर विश्वास कर लिया हो कि ये कार्यक्रम को सफल करा ही देंगे।

तीन नंबर के किले में सेंध की तैयारी
तीन नंबर विधानसभा में यूं तो हर बार विधायक बदल जाता है। भाजपा भी किसी एक पर भरोसा नहीं करती और हर बार टिकट बदल देती है। इसी का फायदा वे लोग उठाने लगते हैं, जो जिले की सबसे छोटी विधानसभा से आस लगाए बैठे हैं। पिछले दिनों एक यात्रा के दौरान प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे के समर्थकों ने यहां पोस्टरबाजी की, लेकिन स्थानीय विधायक का नाम गायब कर दिया। और तो और तीन नंबर के प्रमुख नेताओं के नाम तक नहीं दिए गए। वैसे तीन नंबरी नेता इसे अपने इलाके और गोलू के किले में सेंध मान रहे हैं। हो सकता है कि गौरव की निगाह 3 नंबर पर भी हो।
गौड़ के मजमे में नजर आया पुराना दम
राजनीति में कोई भी आयोजन हो या काम हो, वह बिना किसी मंसूबे के नहीं रहता। ऐसा ही कुछ लोधीपुरा में देखने को मिला, जब वाल्मीकि समाज के गोगादेव छड़ी निशान पूजन के लिए आयोजकों को विधायक मालिनी गौड़ ने अपने घर बुलाया। इस दौरान कार्यक्रम तो भव्य हुआ ही, वहीं चार नंबर खेमे के पुराने साथी शंकर यादव और कैलाश शर्मा भी गौड़ के साथ नजर आए। हालांकि आयोजन को सामाजिक रूप देने के लिए हिन्दरक्षक संगठन का बैनर दिया गया था। गौरव रणदिवे और संघ के कुछ ताकतवर लोग भी यहां दिखे, जिन्होंने बताया कि वे गौड़ परिवार के साथ खड़े हैं।

जीतू के लिए अभी भी लगा रहे हैं दम
भाजपा पार्षद जीतू यादव को पार्टी में नेताओं की कृपा से ले लिया गया है, लेकिन उनके आगे की राह आसान नजर नहीं आ रही है। विधायक रमेश मेंदोला और गोलू शुक्ला के विशेष कृपापात्र जीतू को अब एमआईसी वापस दिलाने में पार्टी के अंदर ही दो गुट हो गए हैं। मालिनी गौड़ खेमा जीतू को किसी भी तरह से अभी तक एमआईसी देने के पक्ष में नहीं है और उन्होंने महापौर के सामने भी अपनी मंशा जता दी है। बताया तो यह जा रहा है कि इस संबंध में ऊपर तक भी जानकारी पहुंचा दी गई है और बताया गया है कि अभी केस पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है, इसलिए जीतू को फिर से एमआईसी नहीं मिलना चाहिए, लेकिन जीतू को एमआईसी वापस दिलाने के लिए एक गुट सक्रिय हो गया है और गुट ने भोपाल तक जाकर नेताओं के सामने सफाई रख दी है कि सबकुछ ठीक है, अब जीतू को ग्रीन सिग्नल दिया जाना चाहिए।

भाजपा बनी कांग्रेस की ब्रांड एम्बेसेडर
भाजपा के अतिउत्साही नेता कांग्रेस के राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए ब्राड एम्बेसेडर साबित हो रहे हैं। बिना ज्यादा प्रचार किए कांग्रेस को इतना प्रचार मिल गया है कि कांग्रेस सोच भी नहीं पाती। दरअसल भाजपा ने राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए शुरू से ही विरोध की रणनीति अपनाना शुरू की। पहले स्थान तो बाद में राहुल गांधी के कार्यक्रम छात्रों की गूंज को लेकर निशाना साधा और जी-भरकर भड़ास निकाली। लेकिन इसके उलट जितने लोगों तक कांग्रेस ने जानकारी पहुंचाई थी, उससे ज्यादा काम तो भाजपा के नेताओं ने हलका कर दिया। ये हम नहीं, बल्कि कांग्रेस नेता ही कह रहे हैं।
फोटो खिंचाने में लगे रहे नए-नवेले सदस्य
आखिरकार भाजपा ने अपनी नगर कार्यसमिति के सदस्यों की घोषणा कर दी। दावा किया जा रहा हेकि नवाचार के उद्देश्य से इसमें उन लोगों को भी लिया गया है, जो युवा पीढ़ी है, लेकिन कल रिंग रोड पर हुई नगर कार्यसमिति की पहली ही बैठक में ऐसे युवा केवल फोटो खिंचाने के लिए पहुंचे। उनका स्वागत केसरिया दुपट्टे से किया गया तो वे इसकी सेल्फी तक लेना नहीं भूले। अंदर जब नेताओं के भाषण चल रहे थे, तब कुछ युवा गर्मी होने का बहाना बनाकर बाहर लॉन में आ गए और फोटो खिंचाने लगे, ताकि सोशल मीडिया पर अपडेट कर यह बताया जा सके कि पार्टी ने उन्हें भी सम्मान दिया है।

डूबते सूरज के सामने कोई सिर नहीं झुकाता
राजनीति में जब सूरज डूबता है तो अच्छे-अच्छे मुंह मोड़ लेते हैं। ऐसा ही कुछ प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल के साथ हुआ। उनका सूरज डूबा तो नहीं, बल्कि अब दिल्ली के आसमान में चमकेगा। पदोन्नति होने के बाद पिछले दिनों भोपाल में उनका स्वागत-सम्मान रखा गया, जिसमें इंदौर से मीडिया की भारी-भरकम फौज होने के बाद भी केवल दिव्या गुप्ता, प्रेम व्यास, नितिन द्विवेदी और आदित्य दीक्षित ही पहुंचे। बाकी इसलिए नहीं गए कि आशीष अग्रवाल से अब क्या काम? वैसे अग्रवाल ने भी भांप लिया कि जिन लोगों को उन्होंने बनाया वे ही इस तरह दूर हो जाएंगे।

भाजपा और कांग्रेस कार्यालय पर छठे-चौमासे दिखने वाले नेताओं की संख्या बढ़ने लगी है। पार्षद बनने का ख्वाब संजोए बैठे नेताओं ने यह बताना शुरू कर दिया कि वे कितने सक्रिय कार्यकर्ता हैं और उनकी वार्ड में दावेदारी मजबूत है।
-संजीव मालवीय

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