
न्यूयॉर्क। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) के मेल मतपत्र प्रतिबंधों को फिलहाल खारिज कर दिया। इस निर्णय से राज्यों को अपनी पुरानी मेल मतपत्र प्रक्रियाओं को जारी रखने की अनुमति मिल गई है। यह फैसला मध्यावधि चुनावों (Mid-term elections) में मतदान शुरू होने के बीच आया है। ट्रंप प्रशासन कांग्रेस पर नियंत्रण के लिए नवंबर के चुनावों से पहले इन प्रतिबंधों को लागू करना चाहता था।
डाक मतपत्र के मामले में जजों की राय क्या?
जस्टिस सैमुअल एलिटो और जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने इस संक्षिप्त आदेश का विरोध किया। जस्टिस ब्रेट कवानुघ ने प्रतिबंधों को मध्यावधि चुनावों के लिए लागू न करने पर सहमति जताई। हालांकि, उन्होंने बाद में ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला सुनाने का संकेत दिया। यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि देश का लगभग एक तिहाई हिस्सा मेल द्वारा मतदान करता है।
2020 में मिली हार का कारण डाक मतपत्र को मानते हैं ट्रंप
चुनाव अधिकारियों ने कहा कि मध्यावधि चुनावों से पहले पूर्ण बदलाव करना संभव नहीं था। अलाबामा, उत्तरी कैरोलिना और विस्कॉन्सिन ने पिछले सप्ताह ही मतदाताओं को मेल मतपत्र भेजना शुरू कर दिया था। उस समय भी नई प्रणाली सक्रिय नहीं थी। ट्रंप ने लंबे समय से मेल मतदान का विरोध किया है। उन्होंने 2020 के चुनाव में जो बाइडेन से अपनी हार के लिए इसे गलत तरीके से दोषी ठहराया था। हालांकि, वह खुद अक्सर इसी तरीके से मतदान करते रहे हैं, जिसमें इस साल भी शामिल है।
ट्रंप प्रशासन की क्या थी योजना?
ट्रंप प्रशासन की योजना में राज्यों को एक समान लिफाफा शैली अपनानी थी। उन्हें योग्य मतदाताओं की सूची एक ऑनलाइन माध्यम पर जमा करनी होती। पोस्टल सर्विस उन राज्यों को मतपत्र देने से मना कर सकती थी जो नियमों का पालन नहीं करते। एक व्हिसलब्लोअर रिपोर्ट ने इस प्रणाली पर चिंता जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन माध्यम ठीक से नहीं बना था। एक बार कोड त्रुटि से लाखों मेल मतपत्रों का पूरा समूह रद्द हो सकता था।
प्रतिबंधों को क्यों चुनौती दी गई?
डेमोक्रेटिक राज्य अधिकारियों और मतदान अधिकार समूहों ने इन प्रतिबंधों को अदालत में चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रपति के पास चुनाव नियम तय करने का सांविधानिक अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, ये नियम एक बड़े चुनाव की पूर्व संध्या पर मेल मतदान को लगभग समाप्त कर देंगे। निचली अदालतों ने ट्रंप की योजना को अवरुद्ध कर दिया था। इसमें राष्ट्रपति द्वारा नामित एक न्यायाधीश द्वारा जारी किया गया प्रारंभिक निषेधाज्ञा भी शामिल था।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
ट्रंप प्रशासन ने निचली अदालतों के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। प्रशासन ने तर्क दिया कि पोस्टल सर्विस पर संघीय नियंत्रण उन्हें मेल मतपत्रों के लिए नियम तय करने की अनुमति देता है। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों का पालन करना संभव था। संघीय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक प्रारंभिक प्रक्रियात्मक निर्णय जीता था। हालांकि, जस्टिस ने योजना की वैधता पर स्पष्ट रूप से कोई फैसला नहीं सुनाया था।
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