img-fluid

महाराष्ट्र की अनोखी परंपरा पर बनी गोंधल फिल्म की ऑस्कर में एंट्री आखिर क्या है यह रस्म

September 19, 2026

नई दिल्ली। मराठी सिनेमा(marathi cinema) की फिल्म गोंधल( film ‘Gondhal’) ने 2027 में होने वाले 99वें अकादमी अवॉर्ड्स(Academy Awards) यानी ऑस्कर (Oscar)के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के रूप में जगह बनाई है। संतोष दावखर के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने 33 अन्य फिल्मों को पीछे छोड़कर यह उपलब्धि हासिल की है। फिल्म की कहानी महाराष्ट्र की सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा गोंधल के इर्द गिर्द बुनी गई है। फिल्म के ऑस्कर तक पहुंचने के बाद अब महाराष्ट्र की इस लोक परंपरा को लेकर भी देशभर में उत्सुकता बढ़ गई है।

गोंधल महाराष्ट्र की एक पारंपरिक धार्मिक रस्म है जिसमें भक्ति गीत संगीत नृत्य और देवी देवताओं की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस रस्म को आमतौर पर गोंधली समुदाय के लोग करते हैं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ भक्ति गीत गाए जाते हैं और नृत्य के जरिए देवी देवताओं का आह्वान किया जाता है। गोंधल का आयोजन खास तौर पर रात के समय होने वाले धार्मिक और पारिवारिक कार्यक्रमों से जुड़ा रहा है। महाराष्ट्र में शादी जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर भी इस परंपरा का आयोजन किया जाता है।

गोंधल के दौरान ढोल सहित कई पारंपरिक वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। तुंतुणे और धातु से बने वाद्य भी इसकी प्रस्तुति का हिस्सा होते हैं। कई आयोजनों में मशाल या दीपक की रोशनी के बीच कलाकार गीत और नृत्य प्रस्तुत करते हैं। पूरी रस्म भक्ति और सामूहिक सहभागिता के माहौल में आगे बढ़ती है और अंत में आरती के साथ इसका समापन होता है।

महाराष्ट्र में गोंधल का महत्व केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं माना जाता। यह लंबे समय से सामाजिक और पारिवारिक जीवन का भी हिस्सा रहा है। ऐसे आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग एक साथ जुटते हैं और पूजा पाठ के साथ रातभर भक्ति संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। फिल्म में नजर आने वाले अभिनेता किशोर कदम ने भी अपने गांव में गोंधल देखने की याद साझा की है। उनके अनुसार यह ऐसा सामुदायिक आयोजन रहा है जिसमें लोग रातभर एक साथ प्रार्थना और उत्सव का हिस्सा बनते थे।

निर्देशक संतोष दावखर ने अपने बचपन के अनुभवों से प्रेरणा लेकर गोंधल को फिल्म की कहानी का केंद्र बनाया है। फिल्म की कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र में आधी रात के समय होने वाले एक गोंधल समारोह के दौरान आगे बढ़ती है। इसमें इशिता देशमुख सुमन नाम की महिला का किरदार निभाती हैं। शादी के बाद सुमन एक अमीर परिवार में अपनी जिंदगी से परेशान नजर आती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात साहेबा नाम के एक आकर्षक गोंधली कलाकार से होती है।

इसके बाद कहानी में रिश्तों के बदलते समीकरण सामने आते हैं। विश्वास और धोखे के बीच घटनाएं आगे बढ़ती हैं और मामला हत्या की साजिश तक पहुंचता है। पूरी कहानी में रातभर चलने वाला गोंधल समारोह सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं बल्कि कथा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आता है।


  • अब फिल्म के ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुने जाने के बाद महाराष्ट्र की यह पारंपरिक रस्म अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचने की राह पर है। गोंधल फिल्म के माध्यम से इस परंपरा को केवल धार्मिक रस्म के रूप में नहीं बल्कि महाराष्ट्र की लोक संस्कृति और सामुदायिक विरासत के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में भी देखने का अवसर मिलेगा।

    Share:

  • सुप्रीम कोर्ट ने ‘शराबबंदी' पर उठाए सवाल....600 से ज्यादा मौतों का जिक्र कर गिनाए 5 बड़े नुकसान

    Sat Sep 19 , 2026
    नई दिल्ली। शराबबंदी (Alcohol Prohibition) के असर पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इससे जुड़ी पांच प्रमुख ‘बुराइयां’ गिनाई हैं। कोर्ट ने कहा कि शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से राजस्व का नुकसान, प्रतिबंध लागू कराने पर खर्च, पुलिस में भ्रष्टाचार, अवैध शराब बनाने और नशीली दवाओं (Narcotic drugs) से जुड़ी […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved