
नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त ने जेल में बिताए अपने समय को याद करते हुए बताया कि वहां के अधिकारियों ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वह परिस्थितियों के सामने नहीं टूटे। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि जब पुलिस ने पहली बार उन्हें हथकड़ी पहनाई थी, तब उनके पिता सुनील दत्त का क्या रिएक्शन था। संजय दत्त के मुताबिक, उस समय उनके पिता की आंखों में आंसू आ गए थे। उन्होंने बताया कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने पिता के सामने खुद को मजबूत बनाए रखा। बातचीत में उनके करियर के उतार-चढ़ाव के साथ जेल के दौरान के अनुभवों पर भी चर्चा हुई।
संजय दत्त से पूछा गया कि क्या बेहद खराब परिस्थितियों में कभी उनके मन में अपना जीवन समाप्त करने का विचार आया था। इस पर उन्होंने साफ कहा कि नहीं, कभी नहीं। बातचीत के दौरान कहा गया कि उन्हें अंडा सेल में रखा गया था, इसके बावजूद उन्होंने अपना मानसिक संतुलन बनाए रखा। संजय दत्त ने अपनी गलतियों को स्वीकार करने और कठिन समय का सामना करने के बारे में भी बात की। उनसे यह भी पूछा गया कि उस पूरे दौर में उन्हें किस पल सबसे ज्यादा कमजोर महसूस हुआ था। इसी बातचीत में उन्होंने पहली बार हथकड़ी लगाए जाने की घटना को याद किया। संजय दत्त ने बताया कि जब पुलिस उन्हें हथकड़ी पहनाकर ले जा रही थी, तब उनके पिता को गहरा झटका लगा था और उनकी आंखों में आंसू थे।
संजय दत्त ने बताया कि उनके पिता ने उस समय भावुक होकर पूछा था कि उनके बेटे के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने अपने पिता को जोर से गले लगाया और कहा कि इन हथकड़ियों की वजह से खुद को परेशान न करें, क्योंकि यह प्रक्रिया का हिस्सा है और उन्हें निराश नहीं होना चाहिए। हालांकि, संजय दत्त ने माना कि सच्चाई यह थी कि यह घटना उन्हें अंदर से प्रभावित कर रही थी, लेकिन अपने पिता के लिए उन्हें मजबूत बने रहना था। उन्होंने कहा कि वह अपने पिता के सामने अपनी मजबूती बनाए रखना चाहते थे, भले ही उस समय वह खुद अंदर से कठिन स्थिति से गुजर रहे थे।
जेल के अनुभव के बारे में संजय दत्त ने बताया कि वहां के अधिकारियों को लगता था कि उनके सेलिब्रिटी स्टेटस से जुड़ी सुविधाएं छीन लेने से वह टूट जाएंगे। लेकिन उनके मुताबिक ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि वह नहीं टूटे और अधिकारियों को भी इससे झटका लगा। संजय दत्त ने बताया कि वहां कुछ लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया। उनमें से एक व्यक्ति उनके पास आया और कहा कि यहां उन्हें सिगरेट नहीं मिलेगी और अब वह क्या करेंगे। इस पर संजय दत्त ने जवाब दिया कि क्या वहां बीड़ी मिलेगी। उन्होंने कहा कि इन बदलावों से उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ा और वह परिस्थितियों के सामने टूटे नहीं।
संजय दत्त की पहली गिरफ्तारी साल 1993 में हुई थी। उन्हें 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किया गया था और मामले से जुड़े अवैध हथियार रखने के आरोप में टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट यानी TADA और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे। उन्होंने अलग-अलग समय में कुल मिलाकर करीब 18 महीने अंडरट्रायल के तौर पर जेल में बिताए। साल 2007 में विशेष TADA अदालत ने उन्हें आतंकवाद से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए छह साल की सजा सुनाई। बाद में साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा की अवधि छह साल से घटाकर पांच साल कर दी।
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