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कोर्ट का आदेश, कमेटी की रिपोर्ट… फिर भी छात्रसंघ चुनाव अधर में

October 05, 2026

  • सितंबर में चुनाव के निर्देश, अक्टूबर में भी नहीं बन रही राह
  • दशहरा-दीपावली के बाद परीक्षा का मौसम बिगाड़ सकता है पूरा गणित

जबलपुर। छात्रसंघ चुनाव की उम्मीद अब लगातार धूमिल होती जा रही है। न्यायालय के निर्देश पर चुनाव की तैयारियां शुरू हुईं, चुनाव प्रक्रिया का रोडमैप तैयार करने के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की गई और समिति ने अपनी रिपोर्ट भी शासन को सौंप दी, लेकिन चुनाव की तारीख अब तक तय नहीं हो सकी है। सितंबर में चुनाव कराने के न्यायालय के निर्देश के बावजूद महीना खत्म होने को है और चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ती नजर नहीं आ रही।


  • सुरक्षा के नाम पर अटका चुनाव
    जानकारों के अनुसार प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चुनाव कराने में असमर्थता जताई गई है। प्रशासन का तर्क है कि दशहरा सामने है और इसके बाद दीपावली की तैयारियां शुरू हो जाएंगी। त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल की जरूरत होगी। ऐसे में छात्रसंघ चुनाव के लिए पर्याप्त बल उपलब्ध कराना मुश्किल होगा। चुनाव के लिए कम से कम 15 दिन का निर्बाध समय जरूरी माना जा रहा है। दशहरा और दीपावली के बाद ही यह समय मिल पाएगा। ऐसे में चुनाव अक्टूबर में भी नहीं हुए तो मामला नवंबर के आगे खिसक सकता है।

    समिति ने अक्टूबर में चुनाव का दिया था सुझाव
    चुनाव प्रक्रिया के लिए गठित समिति ने अक्टूबर में चुनाव कराने की वकालत की थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा सामने आने के बाद प्रदेश स्तर पर चुनाव टालने का निर्णय लिया गया। अब त्योहारों के बाद परीक्षाओं की तैयारियां शुरू होने से चुनाव की संभावनाएं और कमजोर हो गई हैं। क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा प्रो. अल्केश चतुर्वेदी ने बताया कि चुनाव का रोडमैप तैयार करने के लिए गठित समिति की बैठकें हो चुकी हैं और रिपोर्ट भी सौंप दी गई है। चुनाव कब होंगे, यह शासन स्तर पर तय होगा। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ही जानकारी दे सकेंगे।

    पुरानी व्यवस्था पर बनी सहमति
    चुनाव प्रक्रिया और नियमों का रोडमैप तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने छह सदस्यीय समिति बनाई थी। समिति की बैठकों में चुनाव प्रक्रिया को लेकर सहमति बनी और पूर्व में हुए छात्रसंघ चुनावों की व्यवस्था को ही आधार बनाने का निर्णय लिया गया। इसके तहत पहले कक्षा स्तर पर छात्र-छात्राएं मतदान कर क्लास रिप्रजेंटेटिव (सीआर) का चुनाव करेंगे। इसके बाद निर्वाचित सीआर मिलकर अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों का चुनाव करेंगे। इसी प्रक्रिया के तहत पुरुष संघ, महिला संघ और छात्रसंघ के चुनाव कराए जाने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

    दिसंबर तक खिंच सकता है चुनाव
    त्योहारों के बाद यदि चुनाव के लिए 15 दिन का समय मिलता है तो चुनाव प्रक्रिया दिसंबर में पहुंचने की संभावना है। लेकिन तब तक महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में परीक्षाओं का दौर शुरू होने लगेगा। ऐसे में छात्रसंघ चुनाव के लिए अलग से समय निकालना शासन और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। यानी एक बार फिर चुनाव टलने की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।

    देरी से छात्रों में बढ़ रहा आक्रोश
    चुनाव लगातार टलने से छात्रों में नाराजगी बढ़ रही है। पिछले दिनों छात्र संगठनों ने चुनाव कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था। चुनाव की तैयारी में जुटे छात्र संगठनों ने अपनी रणनीति भी बनानी शुरू कर दी थी, लेकिन अब तारीख स्पष्ट नहीं होने से उनमें मायूसी दिखाई दे रही है। न्यायालय के निर्देश, समिति की रिपोर्ट और तैयारियों के बावजूद चुनाव की तारीख तय नहीं होने से छात्रसंघ चुनाव एक बार फिर अनिश्चितता में फंस गया है।

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