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नहीं थे हाथ… महिला ने अपने हाथों से श्रद्धालु को खिलाया खाना, CM चंद्रबाबू हुए मुरीद

October 07, 2026

डेस्क: आंध्र प्रदेश के ‘द्वारका तिरुमाला मंदिर’ से मानवता, सेवा भाव और वात्सल्य को दर्शाती एक बेहद भावुक तस्वीर सामने आई है. मंदिर के अन्नप्रसाद केंद्र में कार्यरत महिला कर्मचारी गायत्री ने दोनों हाथों से लाचार एक दिव्यांग श्रद्धालु को खुद अपने हाथों से भोजन कराकर उसकी भूख मिटाई. इस मानवीय और प्रेरक दृश्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राज्य के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने महिला कर्मचारी की सेवा की जमकर सराहना की है और उन्हें सैल्यूट किया है.

ये पूरी घटना 3 अक्टूबर 2026 को एलुरु जिले में स्थित प्रसिद्ध द्वारका तिरुमाला मंदिर के अन्नप्रसाद हॉल (अन्नदान केंद्र) में घटी. मंदिर में ‘सत्यनारायण’ नामक एक दिव्यांग श्रद्धालु अन्नप्रसाद ग्रहण करने पहुंचे थे. दोनों हाथ न होने के कारण सत्यनारायण को भोजन करने में काफी कठिनाई हो रही थी और वे बेबस नजर आ रहे थे. वहां सेवा दे रहीं महिला कर्मचारी गायत्री की नजर जैसे ही सत्यनारायण पर पड़ी, वे तुरंत उनके पास पहुंचीं. गायत्री ने बिना किसी झिझक के सत्यनारायण के पास बैठकर बड़े ही प्यार और आदर से उन्हें चावल और अन्नप्रसाद अपने हाथों से खिलाना शुरू कर दिया.


  • अन्नप्रसाद केंद्र में मौजूद कुछ अन्य श्रद्धालुओं ने इस करुणा भरे दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया. देखते ही देखते यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया. दोनों हाथों से लाचार भक्त को भरपेट खाना खिलाती गायत्री के इस सेवा भाव ने देशभर के लाखों इंटरनेट यूजर्स का दिल जीत लिया और लोगों की आंखें नम कर दीं.

    ये मामला जैसे ही आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के संज्ञान में आया, वे भी इस दृश्य को देखकर बेहद भावुक हो गए. मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर वीडियो साझा करते हुए लिखा- शाबाश गायत्री! द्वारका तिरुमाला के अन्नप्रसाद केंद्र में दोनों हाथों से लाचार एक दिव्यांग भक्त को अपने हाथों से भोजन कराकर उसकी भूख मिटाने के लिए मैं आपको दिल से सलाम करता हूं. ‘मानव सेवा ही माधव सेवा’ का आपका यह भाव वास्तव में अत्यंत प्रशंसनीय और अनुकरणीय है.

    इस घटना के बाद न केवल मुख्यमंत्री, बल्कि देश-विदेश से मंदिर आने वाले श्रद्धालु और आम नागरिक भी गायत्री के इस निस्वार्थ कार्य की सराहना कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि गायत्री के इस कदम ने समाज को यह बड़ा संदेश दिया है कि भगवान के द्वार पर आने वाले हर दुखी और लाचार इंसान की सेवा करना ही सबसे बड़ी पूजा है.

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